शहनाइयां थमने वाली हैं! 2025 में भूलकर भी इन 4 मौकों पर न करें शादी, वरना दांपत्य जीवन में आ सकती है खटास
Shadi Vivah Muhurt 2025: देवउठनी एकादशी के बाद से घरों में फिर से शादी की रौनक लौटी थी। बैंड-बाजा और बारातियों का शोर शुरू ही हुआ था कि अब फिर से इन पर एक छोटा 'ब्रेक' लगने वाला है। हमारे समाज में शादी-ब्याह सिर्फ दो लोगों का मिलना नहीं, बल्कि सितारों का खेल है। यही वजह है कि हिंदू धर्म में बिना पंचांग और मुहूर्त देखे फेरे नहीं लिए जाते।
अगर आप या आपके परिवार में कोई 2025 में शादी के बंधन में बंधने की तैयारी कर रहा है, तो थोड़ा ठहरिए। साल के कुछ दिन और महीने ऐसे होते हैं जब भले ही आप कितनी भी जल्दी में हों, शादी टाल देनी चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ ग्रहों की चाल नई गृहस्ती के लिए भारी पड़ सकती है।
आइये जानते हैं वो 4 खास समय, जब हिंदू धर्म में शादियां 'वर्जित' (मना) मानी जाती हैं।
1. खरमास (Kharmas): जब सूर्य की चमक पड़ जाती है फीकी
अभी शादियों का सीजन जोरों पर है, लेकिन दिसंबर के बीच में आते-आते इस पर 'पॉज' लग जाएगा। इसे 'खरमास' कहते हैं।
- क्यों नहीं होती शादी: ज्योतिष के जानकारों की मानें तो सूर्य देवता ऊर्जा, सेहत और सफलता की जड़ हैं। जब सूर्य, गुरु (बृहस्पति) की राशि यानी धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उनकी स्थिति थोड़ी कमजोर मानी जाती है। जब रिश्तों को गर्माहट देने वाला सूरज ही धीमा हो, तो पति-पत्नी के रिश्ते की शुरुआत शुभ नहीं मानी जाती। इसलिए खरमास लगते ही मांगलिक कार्य रुक जाते हैं।
2. चातुर्मास (Chaturmas): जब भगवान विष्णु 'योगनिद्रा' में हों
यह साल का वो समय होता है जब शादियों पर सबसे लंबा (4 महीने का) ब्रेक लगता है। यह देवशयनी एकादशी से शुरू होकर देवउठनी एकादशी तक चलता है।
- धार्मिक वजह: मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों के लिए जगत के पालनहार भगवान विष्णु 'योगनिद्रा' (गहरी नींद) में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि की जिम्मेदारी भगवान शिव के पास होती है। चूंकि शादी का आशीर्वाद विष्णु जी और लक्ष्मी जी से जुड़ा है, इसलिए उनके जागने तक कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता।
3. विवाह पंचमी (Vivah Panchami): एक अजीब संयोग
यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है। मार्गशीर्ष महीने (अगहन) के शुक्ल पक्ष की पंचमी को 'विवाह पंचमी' कहते हैं। इसी दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था।
- फिर शादी से परहेज क्यों? लोग राम-सीता की पूजा तो करते हैं, लेकिन इस दिन अपने बच्चों की शादी करने से डरते हैं। ज्योतिषियों का तर्क है कि माता सीता और राम जी का विवाह भले ही इसी दिन हुआ, लेकिन उनका वैवाहिक जीवन बहुत संघर्ष और कष्टों से भरा रहा। माता-पिता नहीं चाहते कि उनके बच्चों की जिंदगी में भी वैसा कष्ट आए, इसलिए इस शुभ तिथि को भी शादी के लिए टाल दिया जाता है।
4. अस्त शुक्र (Combust Venus): जब प्यार का तारा डूबा हो
कुंडली में 'शुक्र' (Venus) को प्रेम, रोमांस और विलासिता का ग्रह माना जाता है।
- लॉजिक क्या है: अगर आसमान में शुक्र तारा अस्त है (दिख नहीं रहा या सूर्य के बहुत करीब है), तो इसका मतलब है कि प्रेम की ताकत कमजोर है। 'तारा डूबा' होने पर की गई शादी में प्यार की कमी और दांपत्य सुख में बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए पंडित जी पहले पंचांग में शुक्र की स्थिति देखते हैं, तभी तारीख पक्की करते हैं।
निष्कर्ष:
शादी जीवन का सबसे बड़ा फैसला है। इसलिए सिर्फ होटल और कैटरिंग ही नहीं, सही समय (मुहूर्त) का चुनाव करना भी बेहद जरूरी है।