Shankaracharya in Lucknow : 26 शर्तों की बेड़ियों में गौ-रक्षा धर्मयुद्ध लखनऊ पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने फूंका विजय शंख
News India Live, Digital Desk : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का तीन दिवसीय 'गौ-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान' आज, 11 मार्च 2026 से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुरू हो गया है। वाराणसी से पैदल पदयात्रा करते हुए लखनऊ पहुंचे शंकराचार्य ने 'गौ माता' को 'राष्ट्र माता' घोषित करने और गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर इस 'धर्मयुद्ध' का औपचारिक शंखनाद किया।
प्रशासन और पुलिस के साथ लंबी खींचतान के बाद, इस कार्यक्रम को 26 सख्त शर्तों के साथ अनुमति दी गई है।
अभियान की मुख्य बातें और कार्यक्रम (Highlights of the Event)
शुभ मुहूर्त में शुरुआत: आज दोपहर 2:15 बजे 'विजय मुहूर्त' में आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति उपवन (पासी किला चौराहा) के पास मुख्य सभा का आयोजन किया गया। यहीं से शंकराचार्य ने गो-प्रतिष्ठा ध्वज के साथ धर्मयुद्ध की घोषणा की।
26 शर्तों की 'लक्ष्मण रेखा': लखनऊ प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और यातायात को देखते हुए 26 शर्तें लागू की हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
किसी भी जाति, धर्म या भाषा के विरुद्ध भड़काऊ भाषण (Provocative speech) पर पूरी तरह प्रतिबंध।
बिना अनुमति के कोई जुलूस या रैली नहीं निकाली जाएगी।
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का प्रयोग वर्जित।
कार्यक्रम स्थल का लगभग 4.63 लाख रुपये शुल्क (GST सहित) आयोजकों को वहन करना पड़ा है।
हनुमान सेतु पर मत्था टेका: लखनऊ पहुंचते ही शंकराचार्य सबसे पहले प्रसिद्ध हनुमान सेतु मंदिर गए और वहां दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने 'गेरुआ राज' (योगी सरकार) में सनातन प्रतीकों के अपमान का आरोप लगाते हुए तीखा हमला भी बोला।
वाराणसी से लखनऊ तक की यात्रा: यह अभियान 7 मार्च को वाराणसी से शुरू हुआ था, जो जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली और नैमिषारण्य जैसे शहरों से होते हुए लखनऊ पहुंचा है।
शंकराचार्य का कड़ा रुख: "सरगम बजाने नहीं आए हैं"
प्रशासन की 'भड़काऊ भाषण न देने' की शर्त पर शंकराचार्य ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे यहां कोई संगीत कार्यक्रम करने नहीं आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वे अपनी बात ही नहीं रख पाएंगे, तो इस आयोजन का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना कहा कि जिस सरकार से उन्हें गो-रक्षा की उम्मीद थी, वहां अब साधु-संतों पर 'डंडे' बरसाए जा रहे हैं।