Self-Care or Selfish? खुद को नंबर 1 पर रखना गुनाह नहीं, ये है मेंटल पीस का असली सीक्रेट
News India Live, Digital Desk : बचपन से हमें यही सिखाया जाता है "दूसरों के बारे में सोचो," "मिल-बांट कर रहो," और "त्याग करना महानता है।" ये संस्कार अच्छे हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि दूसरों को खुश करने के चक्कर में हम खुद को कितना नजरअंदाज कर देते हैं?
हम अक्सर अपनी खुशियों का गला घोंट देते हैं ताकि कोई और नाराज न हो जाए। लेकिन आज के दौर में, जब तनाव और डिप्रेशन (Depression) इतना बढ़ गया है, एक्सपर्ट्स का कहना है कि हमें थोड़ा "सेल्फिश" (Selfish) यानी स्वार्थी बनने की जरूरत है। यहाँ स्वार्थी होने का मतलब किसी का बुरा करना नहीं, बल्कि खुद का भला सोचना (Self-Care) है।
अगर आप मेंटली और फिजिकली फिट रहना चाहते हैं, तो दुनिया की परवाह छोड़कर ये आदतें आज ही अपना लें। यकीन मानिए, इसे "सेल्फिश" नहीं "सेल्फ-लव" कहते हैं।
1. 'ना' कहना सीखें (Learn to Say NO)
क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो मन न होने पर भी किसी काम के लिए "हाँ" कह देते हैं? ऑफिस में एक्स्ट्रा काम हो या दोस्तों के साथ कहीं जाना, अगर आपका शरीर और दिमाग गवाही नहीं दे रहा, तो साफ और विनम्रता से 'ना' (NO) कहना शुरू करें। हर किसी के लिए हर वक्त मौजूद रहना आपको अंदर से खाली कर देगा। अपनी सीमाओं (Boundaries) का सम्मान करें।
2. अपना 'Me-Time' चुराएं
दिन के 24 घंटों में से क्या 20 मिनट भी आप सिर्फ खुद को देते हैं? अगर नहीं, तो यह गलती सुधारें। यह 20 मिनट का समय "सेल्फिश टाइम" होना चाहिए। इसमें न फ़ोन हो, न बच्चे, न घर की टेंशन।
- किताब पढ़ें।
- गाना सुनें।
- या बस चुपचाप बैठें।
यह समय आपके दिमाग को रीचार्ज करने के लिए बहुत जरूरी है।
3. अपनी नींद से समझौता न करें
"अरे, उनका फोन आया था तो बात करनी पड़ी," या "काम खत्म करना था," ये बहाने आपकी सेहत को बर्बाद कर रहे हैं। अपनी 8 घंटे की नींद को लेकर थोड़ा स्वार्थी बनिए। अगर आप थके हुए हैं, तो दुनिया के सारे काम छोड़कर सो जाएं। याद रखें, आप हेल्दी रहेंगे तभी दुनिया की मदद कर पाएंगे।
4. 'टॉक्सिक' लोगों को लाइफ से कट करें
हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग जरूर होते हैं जो हमेशा निगेटिव बातें करते हैं, नीचा दिखाते हैं या सिर्फ अपना रोना रोते हैं। ऐसे लोगों से दूरी बनाना 'मतलबी' होना नहीं, बल्कि अपनी मेंटल हेल्थ को बचाना है। जो आपके मन की शांति भंग करे, उसके लिए अपने दरवाजे बंद करना ही समझदारी है।
5. मदद मांगना सीखें
अक्सर हम "सुपरमैन" या "सुपरवुमन" बनने के चक्कर में सारे बोझ खुद उठा लेते हैं। जब जरूरत पड़े तो बेझिझक मदद मांगें। खुद को जलाकर दूसरों को रौशनी देना कोई समझदारी नहीं है।