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April 18 2026 09:23 am

झारखंड के नए DGP की नियुक्ति पर फंसा पेंच, गृह मंत्रालय की आपत्ति के बाद ताशा मिश्रा का चयन विवादों में

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News India Live, Digital Desk: झारखंड के नए पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर दिल्ली से रांची तक सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। तदाशा मिश्रा को राज्य का नया पुलिस कप्तान बनाने के हेमंत सोरेन सरकार के फैसले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गंभीर आपत्ति जताई है। मंत्रालय ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर नियुक्ति की प्रक्रिया और नियमों को लेकर जवाब तलब किया है। इस कड़े रुख के बाद अब झारखंड में डीजीपी की कुर्सी को लेकर कानूनी और संवैधानिक संकट खड़ा होता दिख रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के 'प्रकाश सिंह जजमेंट' का उल्लंघन?

गृह मंत्रालय का तर्क है कि डीजीपी की नियुक्ति के लिए यूपीएससी (UPSC) द्वारा तैयार किए गए पैनल और सुप्रीम कोर्ट के 'प्रकाश सिंह' मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार, राज्य सरकार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल यूपीएससी को भेजना होता है, जिसमें से तीन योग्य नामों का चयन कर वापस राज्य को भेजा जाता है। गृह मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि वर्तमान नियुक्ति में निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी की गई है, जो सीधे तौर पर नियमों के विरुद्ध है।

तदाशा मिश्रा की वरिष्ठता और चयन पर सवाल

झारखंड कैडर की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा के नाम पर सरकार ने मुहर तो लगा दी, लेकिन पैनल में शामिल अन्य अधिकारियों की वरिष्ठता को दरकिनार किए जाने के आरोप लग रहे हैं। केंद्र सरकार ने राज्य से पूछा है कि किन परिस्थितियों में और किस आधार पर तदाशा मिश्रा को वरीय अधिकारियों के ऊपर तरजीह दी गई। इस पत्र के बाद राज्य सचिवालय में बैठकों का दौर शुरू हो गया है और कानूनी विशेषज्ञों से राय ली जा रही है ताकि केंद्र के सवालों का तार्किक जवाब दिया जा सके।

बैकफुट पर राज्य सरकार या आर-पार की जंग?

यह पहला मौका नहीं है जब झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर केंद्र और राज्य आमने-सामने हैं। इससे पहले भी कई बार तकनीकी कारणों से नियुक्तियां विवादों में रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राज्य सरकार संतोषजनक जवाब नहीं दे पाती है, तो उन्हें अपना फैसला वापस लेना पड़ सकता है या फिर मामला अदालत की चौखट तक पहुंच सकता है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और इसे प्रशासनिक अराजकता करार दिया है।

पुलिस महकमे में असमंजस, कामकाज पर असर

शीर्ष पद पर जारी इस खींचतान का असर झारखंड पुलिस के मनोबल और कामकाज पर भी पड़ रहा है। तबादलों और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। अधिकारी इस बात के इंतजार में हैं कि क्या तदाशा मिश्रा अपने पद पर बनी रहेंगी या केंद्र के दबाव में सरकार किसी नए नाम का ऐलान करेगी। गृह मंत्रालय के इस 'लेटर बम' ने फिलहाल झारखंड की राजनीति में नई तपिश पैदा कर दी है।