SC Judge Statement : सत्ताधारी नाराज हों तो होने दें, सही फैसला लेने से न हिचकें, जस्टिस नागरत्ना का जजों को कड़ा संदेश
News India Live, Digital Desk : जस्टिस नागरत्ना ने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया कि एक न्यायाधीश का सबसे बड़ा गुण उसकी स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को किसी भी बाहरी दबाव या राजनीतिक लाभ-हानि से ऊपर उठकर काम करना चाहिए।
1. "सत्ताधारियों की परवाह न करें" (Don't Worry About Power)
जस्टिस नागरत्ना ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
निडरता: न्यायाधीशों को इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि उनके फैसले से सत्ता में बैठे लोग (Executive) नाराज होंगे या नहीं।
कैरियर का मोह: उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई जज इस डर से फैसला बदलता है कि इससे उसकी पदोन्नति (Promotion) रुक जाएगी या वह सरकार की 'नापसंद सूची' में आ जाएगा, तो वह अपने पद के साथ न्याय नहीं कर रहा है।
न्यायिक धर्म: उन्होंने कहा, "हमें अपनी शपथ का पालन करना चाहिए, जो हमारा 'न्यायिक धर्म' है, चाहे इसके परिणाम हमारे करियर पर कुछ भी हों।"
2. सबसे छोटा लेकिन सबसे शक्तिशाली शब्द: "NO"
प्रलोभनों और दबावों के संदर्भ में उन्होंने एक बहुत ही व्यावहारिक बात कही:"अंग्रेजी भाषा का सबसे छोटा शब्द और सबसे छोटा वाक्य 'NO' (नहीं) है। जब भी आपके सामने कोई प्रलोभन या अनुचित प्रभाव आए, बस यह शब्द कह दें। इससे आपका दिमाग और भविष्य हमेशा के लिए साफ रहेगा।"
3. 'बुलडोजर न्याय' पर कड़ा प्रहार
व्याख्यान के दौरान उन्होंने बिना नाम लिए कार्यपालिका द्वारा की जाने वाली त्वरित कार्रवाइयों (जैसे घर गिराना) पर भी टिप्पणी की:
उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन किसी आरोपी का घर बिना कानूनी प्रक्रिया और बिना अदालती ट्रायल के गिरा देता है, तो वह खुद 'जज' की भूमिका में आ जाता है।
यह संवैधानिक ढांचे (Constitutional Scheme) के ढहने जैसा है। न्याय करना केवल अदालतों का काम है, पुलिस या प्रशासन का नहीं।
4. विधिक जगत में प्रतिक्रिया
जस्टिस नागरत्ना के इस बयान को न्यायिक जगत में बहुत सराहा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर अक्सर सवाल उठते हैं, एक वर्तमान सुप्रीम कोर्ट जज का यह बयान निचली अदालतों और हाईकोर्ट के जजों का मनोबल बढ़ाने वाला है।