Saraswati Puja 2026 : क्या आपके बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लग रहा? इस पावन दिन पर माँ को ऐसे करें प्रसन्न

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News India Live, Digital Desk: बसंत पंचमी का दिन यानी वो समय जब प्रकृति खुद को पीले फूलों और ताजी हवाओं से सजाती है। यह दिन न सिर्फ वसंत के आगमन का प्रतीक है, बल्कि कला, संगीत और सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा' की देवी माँ सरस्वती की वंदना का महापर्व है। साल 2026 में भी यह त्यौहार बड़ी ही श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।

अक्सर हम सब अपने बच्चों या अपने खुद के करियर और ज्ञान को लेकर थोड़े चिंतित रहते हैं। कोई परीक्षा का डर हो या नई भाषा सीखने की ललक, हम सबको थोड़े 'मार्गदर्शन' और 'बुद्धि' की जरूरत होती है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन 'सरस्वती चालीसा' (Saraswati Chalisa) का पाठ करना न केवल मन को शांति देता है, बल्कि हमारी याददाश्त और बुद्धि को भी कुशाग्र बनाता है।

क्यों खास है सरस्वती चालीसा?

सरस्वती चालीसा में माँ सरस्वती की महिमा का बखान बहुत ही सरल और सुंदर शब्दों में किया गया है। जब हम इसे पढ़ते हैं, तो यह हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा भर देता है। आपने महसूस किया होगा कि कभी-कभी लाख कोशिशों के बाद भी पढ़ाई में ध्यान नहीं लगता। ऐसे में इस चालीसा का पाठ एकाग्रता (Concentration) बढ़ाने का एक आध्यात्मिक जरिया बन जाता है।

पूजा की सरल विधि और पीले रंग का महत्व

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का एक अलग ही महत्व है। पीला रंग ज्ञान और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। 2026 की सरस्वती पूजा के दिन सुबह जल्दी स्नान करके पीले कपड़े पहनना और माँ की प्रतिमा के सामने पीला गुलाल और फूल चढ़ाना बहुत शुभ होता है। इसके साथ ही, अगर आप विद्यार्थी हैं, तो अपनी सबसे पसंदीदा किताब या पेन को भी पूजा में जरूर रखें।

बसंत पंचमी 2026: एक नई शुरुआत

यह त्यौहार सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह दिन नई शुरुआत के लिए सबसे उत्तम माना गया है। छोटे बच्चों का 'अक्षर ज्ञान' यानी उनकी पढ़ाई की शुरुआत भी इसी दिन से करना बहुत फलदायी माना जाता है। अगर आप भी 2026 में अपने करियर में कोई नया कदम उठाना चाहते हैं, तो माँ का आशीर्वाद और सरस्वती चालीसा का पाठ आपकी नैया पार लगा सकता है।

कुल मिलाकर, श्रद्धा के साथ बोली गई एक छोटी सी प्रार्थना भी बड़ी शक्ति रखती है। तो इस बार जब बसंत की हवाएं बहें और कोयल कूकना शुरू करे, तो माँ सरस्वती की शरण में जाकर अपने भीतर के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से जरूर मिटाएं।