बिना Ph.D. के नहीं बढ़ेगी सैलरी? हाईकोर्ट ने लेक्चरर्स के ग्रेड पे (AGP) पर सुनाया बड़ा फैसला, जानिये नया नियम
News India Live, Digital Desk : अक्सर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले शिक्षकों के बीच इस बात को लेकर बहस रहती है कि क्या प्रमोशन या उच्च वेतनमान (Higher Pay Scale) पाने के लिए पीएचडी (Ph.D.) की डिग्री होना अनिवार्य है? या फिर लंबे समय का अनुभव ही काफी होना चाहिए? अब इस उलझन को हाईकोर्ट ने पूरी तरह साफ कर दिया है।
कोर्ट का फैसला: डिग्री के बिना हक नहीं!
हाईकोर्ट ने अपने एक ताजा फैसले में स्पष्ट किया है कि उच्चतर एकेडमिक ग्रेड पे (Higher AGP) पाने के लिए पीएचडी की डिग्री एक अनिवार्य योग्यता है। अगर किसी शिक्षक के पास यह डिग्री नहीं है, तो वह उच्च वेतन का दावा 'अधिकार' के रूप में नहीं कर सकता।
अदालत ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि शिक्षक खुद भी उस उच्चतम स्तर तक शिक्षित हों। सीधे शब्दों में कहें तो, अब केवल तजुर्बा आपकी सैलरी स्लैब (Salary Slab) नहीं बढ़ा पाएगा, आपको शोध और पढ़ाई के जरिए अपनी डिग्री पूरी करनी ही होगी।
AICTE के नियमों को दी हरी झंडी
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब AICTE (All India Council for Technical Education) के नियमों की दुहाई दी गई। हाईकोर्ट ने माना कि AICTE जैसी नियामक संस्थाएं अगर कोई मानक (Standards) तय करती हैं, तो उन्हें मानना हर संस्थान और शिक्षक की जिम्मेदारी है। इन नियमों का मकसद तकनीकी शिक्षा के स्तर को ऊँचा उठाना है।
कई लेक्चरर्स को उम्मीद थी कि सेवा के कुछ वर्ष बीत जाने के बाद उनका ग्रेड पे खुद-ब-खुद बढ़ जाएगा, लेकिन कोर्ट ने इस 'Automatic Promotion' या पे-हाइक की सोच को पूरी तरह से नकार दिया है।
इसका शिक्षकों पर क्या असर होगा?
इस फैसले का सीधा असर उन हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा जो लंबे समय से एडहॉक या नियमित आधार पर पढ़ा रहे हैं लेकिन उनके पास पीएचडी नहीं है। अब उनके सामने दो ही रास्ते हैं:
- या तो वे शोध कार्य शुरू करके अपनी पीएचडी पूरी करें।
- या फिर उन्हें उसी पुरानी सैलरी और ग्रेड पे पर संतोष करना पड़ेगा जो उनके पास फिलहाल है।
यह आदेश न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के शैक्षणिक ढांचे के लिए एक नजीर बन सकता है। उच्च शिक्षा संस्थानों को भी अब अपनी नियुक्ति और प्रमोशन प्रक्रिया में इसे सख्ती से लागू करना होगा।