Russia MiG-41 : स्पीड 5 गुना ज़्यादा, उड़ान अंतरिक्ष तक ,रूस का MiG-41 ,क्यों है ये पुतिन का आखिरी ब्रह्मास्त्र?
News India Live, Digital Desk : Russia MiG-41 : दुनिया की नज़र इस बात पर है कि रूस अब आसमान में अपनी ताक़त कैसे बढ़ा रहा है. ख़बरें हैं कि रूस अपनी सबसे शानदार इंटरसेप्टर यानी दुश्मन को रोकने वाले विमान मिग-31 को रिटायर करने की तैयारी में है, और इसकी जगह लेने आ रहा है 'मिग-41' (MiG-41). यह कोई मामूली विमान नहीं है, बल्कि 'पाक डीपी' (PAK DP – पर्स्पेक्टिव एयर कॉम्प्लेक्स फॉर लॉन्ग-रेंज इंटरसेप्शन) प्रोजेक्ट के तहत बन रहा एक ऐसा सुपरसोनिक विमान है, जो अमेरिकी एफ-35 जैसे लड़ाकू विमानों और यहाँ तक कि अंतरिक्ष के खतरों से भी निपटने की क्षमता रखेगा. पुतिन का यह नया घातक हथियार, दुनिया की हवाई सुरक्षा और रणनीति को हमेशा के लिए बदल सकता है.
क्यों ख़ास है MiG-41?
रूसी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि यह विमान मौजूदा मिग-31 का सिर्फ़ अपग्रेड नहीं होगा, बल्कि एक पूरी तरह से नया और नेक्स्ट-जनरेशन एयरक्राफ्ट होगा. इसे दुनिया का सबसे तेज़ इंटरसेप्टर (या शायद लड़ाकू विमान) कहा जा रहा है, जो कई रिकॉर्ड तोड़ सकता है.
- ज़बरदस्त रफ़्तार: दावा है कि मिग-41 की गति मच 4 से मच 5 (आवाज़ की गति से 4 से 5 गुना तेज़) तक हो सकती है. अगर यह सच हुआ, तो यह विमान दुनिया के किसी भी मौजूदा फाइटर जेट से बहुत ज़्यादा तेज़ होगा, और इसे रोक पाना दुश्मन के लिए लगभग असंभव हो जाएगा.
- ऊँची उड़ान और अंतरिक्ष तक पहुँच: यह विमान इतनी ऊँचाई पर उड़ान भर पाएगा, जहाँ हवा भी कम होती है और अंतरिक्ष शुरू होने लगता है. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, इसे लो-ऑर्बिट स्पेस (धरती के सबसे क़रीबी कक्षा) में भी ऑपरेट करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है. यानी यह न सिर्फ़ हवाई लक्ष्यों को रोकेगा, बल्कि अंतरिक्ष में मंडरा रहे खतरों को भी बेअसर कर सकेगा.
- स्टेल्थ तकनीक और घातक हथियार: इसे नवीनतम स्टेल्थ तकनीक से लैस किया जाएगा, जिससे यह दुश्मन के रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाएगा. इसके हथियारों की बात करें, तो यह 'आर-37' जैसी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें ले जाएगा. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसे सैटेलाइट विरोधी मिसाइलों और शायद लेज़र या हाइपरसोनिक मिसाइलों से भी लैस किया जा सकता है.
- कब तक आएगा यह विमान? उम्मीद है कि यह 2030 के दशक के मध्य तक मिग-31 की जगह ले लेगा, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसे इससे पहले भी सेना में शामिल किया जा सकता है.
पुतिन हमेशा नए और ज़्यादा असरदार हथियार बनाने पर ज़ोर देते रहे हैं, और मिग-41 उन्हीं कोशिशों का नतीजा है. यह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से बढ़ते हवाई और अंतरिक्ष संबंधी खतरों का मुक़ाबला करने के लिए रूस का एक बड़ा और रणनीतिक जवाब माना जा रहा है.