Rules of chanting the name : प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कहां और कैसे करें हरिनाम संकीर्तन
- by Archana
- 2025-08-21 10:50:00
News India Live, Digital Desk: Rules of chanting the name : वृंदावन के संत और गुरु प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचनों और मार्गदर्शन के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं. उनके भक्तों में एक सामान्य प्रश्न रहता है कि क्या वे बिस्तर पर बैठकर भगवान का नाम जप (हरिनाम संकीर्तन) कर सकते हैं. महाराज जी ने इस शंका का निवारण करते हुए सरल और व्यावहारिक रूप से समझाया है कि नाम जप कैसे करना चाहिए और उसकी वास्तविक पवित्रता कहाँ निहित है.
प्रेमानंद जी महाराज ने बताया है कि नाम जप करने का कोई निश्चित स्थान या समय नहीं है. यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आप किस आसन में बैठे हैं या आप किस स्थान पर हैं; महत्वपूर्ण यह है कि आप जिस भगवान का नाम जप कर रहे हैं, उनके प्रति आपके मन में कितनी एकाग्रता और श्रद्धा है. उन्होंने जोर दिया कि यदि आपका मन पवित्र है और आपकी चेतना हरिनाम में लीन है, तो बिस्तर पर बैठकर भी किया गया नाम जप पूर्णतः स्वीकार्य है. महाराज जी का कहना है कि आप नाम जप बिस्तर पर लेटे-लेटे भी कर सकते हैं, यदि आपका हृदय निर्मल है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि, शौच या मलमूत्र त्याग करते समय या उस स्थान पर हरिनाम जप नहीं करना चाहिए. स्नान और स्वच्छता का भी इसमें महत्व है. सामान्यतः, शौच करने या भोजन करने से पहले यदि हाथ और मुंह स्वच्छ नहीं हैं, तो सीधे भगवान का नाम नहीं लेना चाहिए. जब मन पूरी तरह शुद्ध और पवित्र हो, तभी मुख से नाम जप निकलना चाहिए. यह दिखावे का विषय नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि का मामला है.
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, यदि किसी को बिस्तर पर आलस्य आ रहा हो, तो उसे उठकर आसन लगाकर बैठकर ही नाम जप करना चाहिए. आलस्य से बचने के लिए, एक चटाई या कुश के आसन पर बैठकर भी हरिनाम संकीर्तन किया जा सकता है. वे जोर देते हैं कि भगवान के नाम में स्वयं इतनी शक्ति है कि वह आपको अपनी ओर आकर्षित करता है, और जो व्यक्ति नियमबद्ध रूप से और पूर्ण श्रद्धा के साथ नाम जप करता है, उसके लिए वह कभी व्यर्थ नहीं जाता. हरिनाम संकीर्तन ही कलयुग में उद्धार का एकमात्र सरल और सहज मार्ग है, जिसे किसी भी स्थिति में और किसी भी स्थान पर, मन की पवित्रता के साथ किया जा सकता है. उनका मार्गदर्शन भक्तों को सरल भाव से साधना करने के लिए प्रेरित करता है, जिससे वे अपने आराध्य के करीब महसूस कर सकें.
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