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April 28 2026 03:50 am

रुद्राक्ष धारण करने के नियम गलत तरीके से पहना तो हो सकता है नुकसान, जानें सही दिन और पहनने की सही विधि

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News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में रुद्राक्ष को साक्षात भगवान शिव का अंश माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आंसुओं से हुई है। इसे धारण करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा में भी वृद्धि होती है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रुद्राक्ष धारण करने के कुछ कड़े नियम हैं। यदि बिना नियमों के पालन के इसे पहना जाए, तो यह शुभ फल देने के बजाय प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकता है।

रुद्राक्ष पहनने का सबसे शुभ दिन

यूं तो शिव भक्ति के लिए हर दिन उत्तम है, लेकिन रुद्राक्ष धारण करने के लिए कुछ विशेष दिन शास्त्रों में बताए गए हैं:

सोमवार: यह दिन भगवान शिव को समर्पित है, इसलिए सोमवार को रुद्राक्ष पहनना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

सावन का महीना: पूरे सावन मास में किसी भी दिन रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत फलदायी होता है।

शिवरात्रि व महाशिवरात्रि: इन तिथियों पर रुद्राक्ष पहनना सौभाग्य लेकर आता है।

पूर्णिमा: वैशाख पूर्णिमा या अन्य किसी भी मास की पूर्णिमा को भी इसे धारण किया जा सकता है।

पहनने से पहले करें ये जरूरी काम (शुद्धिकरण विधि)

बाजार से रुद्राक्ष लाकर सीधे गले में नहीं डालना चाहिए। इसकी एक निश्चित विधि है:

शुद्धिकरण: रुद्राक्ष को पहले गंगाजल या कच्चे दूध से धो लें।

पूजा: पंचामृत से स्नान कराने के बाद इस पर चंदन लगाएं और धूप-दीप दिखाएं।

अभिमंत्रित करना: रुद्राक्ष को हाथ में लेकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके बाद ही इसे धारण करें।

रुद्राक्ष से जुड़ी सामान्य गलतियां (सावधानियां)

रुद्राक्ष की पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है। धारण करने वालों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

अपवित्र स्थान: श्मशान घाट जाते समय या किसी के जन्म/मृत्यु के सूतक काल के दौरान रुद्राक्ष उतार देना चाहिए।

सोते समय: सोते वक्त रुद्राक्ष उतारकर मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर रखना चाहिए, क्योंकि सोते समय शरीर की शुद्धि का ध्यान नहीं रहता।

साफ-सफाई: गंदे हाथों से रुद्राक्ष को न छुएं। यदि धागा पुराना या मैला हो जाए, तो उसे तुरंत बदल दें।

किसी और का रुद्राक्ष: कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति का पहना हुआ रुद्राक्ष खुद न पहनें और न ही अपना किसी को दें।

तामसिक भोजन: रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा और नशीली वस्तुओं के सेवन से परहेज करना चाहिए।

धागे और धातु का चयन

रुद्राक्ष को हमेशा लाल, पीले या सफेद रेशमी धागे में पिरोकर पहनना चाहिए। यदि आप इसे धातु में पहनना चाहते हैं, तो चांदी या सोना सबसे उत्तम माना जाता है। लोहे या काले धागे का प्रयोग करने से बचना चाहिए।

किस मुखी का क्या महत्व?

रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर इक्कीस मुखी तक होते हैं। अपनी कुंडली या समस्या के अनुसार ही रुद्राक्ष का चुनाव करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, पंचमुखी रुद्राक्ष को सबसे सुलभ और सुरक्षित माना जाता है, जिसे कोई भी धारण कर सकता है, जबकि एक मुखी या चौदह मुखी पहनने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है।