रामायण फिल्म पर बवाल? रहमान ने मांगी माफ़ी या रखी अपनी बात? जानिये म्यूजिक मैस्ट्रो ने क्या कहा
News India Live, Digital Desk: हम सब ए.आर. रहमान (AR Rahman) को जानते हैं वो शख्स जिसने 'जय हो' से दुनिया को झुमाया और 'कुन फाया कुन' से रूह को सुकून दिया। उनके लिए संगीत ही इबादत है, और संगीत ही धर्म। लेकिन हाल ही में, आने वाली भव्य फिल्म 'रामायण' में उनके संगीत देने को लेकर सोशल मीडिया पर एक बेवजह का विवाद (Communal Row) खड़ा हो गया था। कुछ लोगों ने उनके धर्म को लेकर सवाल उठाए थे।
इन सभी नफरत भरी आवाजों के बीच, ऑस्कर विनर रहमान ने अपनी खामोशी तोड़ी है और जो कहा है, वो वाकई दिल को छू लेने वाला है।
क्या है रहमान का जवाब?
रहमान हमेशा बहुत ही शांत और सौम्य रहते हैं, और उनका जवाब भी वैसा ही था। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा, "मेरा मकसद कभी किसी को दुख पहुंचाना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं रहा।"
जब उनसे 'रामायण' (Ramayana) फिल्म का हिस्सा बनने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी और 'सम्मान' (Honour) बताया। रहमान का मानना है कि 'रामायण' जैसी महाकाव्य का संगीत बनाना उनके लिए गर्व की बात है, क्योंकि यह भारत की संस्कृति की जड़ है।
कला को धर्म में क्यों बांटना?
सोचिये जरा, जिस इंसान ने 'मा तुझे सलाम' जैसा गीत बनाया हो, क्या उसके लिए सरहदों या धर्मों की कोई दीवार हो सकती है? रहमान ने बातों ही बातों में यह सन्देश दे दिया कि एक सच्चा कलाकार सभी सीमाओं से ऊपर होता है।
उन्होंने यह भी इशारा किया कि वो नफरत पर ध्यान नहीं देते, बल्कि अपने काम से लोगों को जोड़ना चाहते हैं। वो मानते हैं कि संगीत एक ऐसी भाषा है जो टूटे हुए दिलों को भी जोड़ सकती है, फिर चाहे वो राम का भजन हो या सूफी कव्वाली।
फैंस का मिला साथ
जैसे ही रहमान का यह बयान आया, उनके फैंस ने उनका पूरा सपोर्ट किया। सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि "संगीत का कोई मजहब नहीं होता।" रहमान साहब का यह नजरिया हमें सिखाता है कि विवाद करने वाले तो करते रहेंगे, लेकिन असली कलाकार वही है जो सबको साथ लेकर चले।