RSSB chairman : राजस्थान में सरकारी नौकरी फर्जी तलाक का खेल आरएसएसबी अध्यक्ष का खुलासा

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Newsindia live,Digital Desk:  RSSB chairman : राजस्थान में सरकारी नौकरियों के लिए 'फर्जी तलाक' के मुद्दे पर राजस्थान अधीनस्थ और मंत्रिस्तरीय सेवा चयन बोर्ड आर एस एस बी के अध्यक्ष ने चिंता व्यक्त की है उन्होंने बताया कि कैसे कुछ अभ्यर्थी आरक्षण का लाभ लेने के लिए तलाक का झूठा दावा कर रहे हैं जिससे वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं को नुकसान हो रहा है यह मामला अब न्यायिक समीक्षा और प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहा है

बोर्ड अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसे कई मामले मिले हैं जहाँ उम्मीदवारों ने विशेष रूप से महिला आरक्षण को प्राप्त करने के लिए झूठे या नकली तलाक प्रमाणपत्र जमा किए हैं ये फर्जीवाड़े न्यायिक और सामाजिक प्रणालियों पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं ऐसी स्थिति में यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है कि कौन वास्तविक लाभार्थी है और कौन गलत लाभ उठा रहा है

इस समस्या की जड़ न्यायिक प्रक्रिया में छिपी है न्यायालयों द्वारा जारी किए गए एकपक्षीय तलाक के आदेशों की बढ़ती संख्या इस प्रवृत्ति का मुख्य कारण मानी जाती है कई तलाक में पति पत्नी आपसी सहमति से तलाक के दस्तावेज तैयार करते हैं लेकिन यह अक्सर दिखावटी होते हैं और इसका उद्देश्य सिर्फ आरक्षण का लाभ लेना होता है समाजशास्त्री और कानूनी विशेषज्ञ ऐसी एकपक्षीय तलाक के आदेशों की सत्यता पर सवाल उठा रहे हैं और यह जानने की मांग कर रहे हैं कि इनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए कौन से उपाय किए जाने चाहिए

आरएसएसबी के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि बोर्ड इन मामलों को अदालत में पेश करेगा और अदालत के निर्देशों का इंतजार करेगा ताकि उचित कार्रवाई की जा सके इसका मतलब यह है कि बोर्ड न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तैयार है ताकि इन धोखाधड़ी वाले मामलों को चुनौती दी जा सके और भविष्य में ऐसे प्रयासों को रोका जा सके हालांकि यह एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी

यह मामला केवल राजस्थान तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य राज्यों में भी इसी तरह की समस्याएँ सामने आ रही हैं जहाँ लोग सरकारी नौकरी या अन्य लाभों के लिए आरक्षण नियमों का दुरुपयोग कर रहे हैं इससे वास्तविक जरूरतमंद और वंचित वर्गों के लिए अवसरों में कमी आती है जिससे सामाजिक न्याय की मूल भावना प्रभावित होती है

इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई कदम उठाए जा सकते हैं इसमें तलाक के दस्तावेजों की बेहतर सत्यापन प्रक्रिया बनाना और न्यायालयों को अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता शामिल है इसके अलावा समाज में जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता है ताकि लोग फर्जी तलाक के नुकसानों को समझें और सही नियमों का पालन करें फर्जीवाड़ा करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि दूसरों को ऐसा करने से रोका जा सके बोर्ड अध्यक्ष के बयान से साफ है कि यह समस्या अब सरकार के ध्यान में आ चुकी है और इस पर गंभीर कदम उठाए जाएंगे जिससे भविष्य में समाज के साथ कोई खिलवाड़ ना हो और सही व्यक्ति को नौकरी मिले

 

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