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March 26 2026 10:28 am

RGHS Payment : राजस्थान में आज से कैशलेस दवा मिलना बंद 8 महीने का भुगतान अटका 50 लाख कर्मचारियों की बढ़ी मुसीबत

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News India Live, Digital Desk : राजस्थान सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना 'राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम' (RGHS) एक बार फिर वेंटिलेटर पर पहुँच गई है। राजस्थान एलायंस ऑफ हॉस्पिटल एसोसिएशंस (RAHA) और फार्मा संघ के कड़े फैसले के बाद 25 मार्च 2026 से प्रदेश के निजी अस्पतालों और आउटडोर (OPD) फार्मेसी काउंटरों पर कैशलेस दवा वितरण पूरी तरह ठप हो गया है। इस फैसले ने राज्य के करीब 50 लाख लाभार्थियों, जिनमें विशेष रूप से बुजुर्ग पेंशनर्स शामिल हैं, को अधर में लटका दिया है।

करोड़ों का बकाया बना गले की फांस, 'राहा' का बड़ा फैसला इस बड़े संकट की मुख्य वजह पिछले 8 से 9 महीनों से सरकार के पास अटका भारी-भरकम बजट है। 'राहा' के प्रतिनिधियों के अनुसार, अस्पतालों और दवा विक्रेताओं का करोड़ों रुपया सरकार पर बकाया है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि थोक दवा आपूर्तिकर्ताओं ने अब अस्पतालों को उधार पर दवा देना बंद कर दिया है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि यह कोई हड़ताल नहीं बल्कि 'मजबूरी' है, क्योंकि उनके पास नई दवाएं खरीदने के लिए कार्यशील पूंजी (Working Capital) ही नहीं बची है।

पेंशनर्स और गंभीर मरीजों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' इस गतिरोध की सबसे बड़ी मार उन बुजुर्ग पेंशनर्स पर पड़ी है जो अपनी जीवनभर की कमाई के बाद बुढ़ापे में मुफ्त दवाओं के भरोसे थे। कैंसर, किडनी, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए हर दिन की दवा अनिवार्य है। कैशलेस सुविधा बंद होने का मतलब है कि अब इन मरीजों को अपनी जेब से भारी खर्च करना होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो कई मरीजों के जीवन पर खतरा मंडरा सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री की 'अज्ञानता' और समन्वय का अभाव हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक ओर प्रदेशभर में सेवाएं ठप हो रही हैं, वहीं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें विभाग के अधिकारियों ने इस फैसले की जानकारी नहीं दी है। हालांकि, 'राहा' का दावा है कि उन्होंने राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी को पहले ही औपचारिक पत्र के जरिए सूचित कर दिया था। अधिकारियों के इस ढुलमुल रवैये और वित्त विभाग के साथ समन्वय की कमी ने लाभार्थियों के गुस्से को और भड़का दिया है।

बीमा आधारित मॉडल (Insurance Model) की ओर कदम? संकट के बीच स्वास्थ्य मंत्री ने संकेत दिए हैं कि सरकार RGHS को जल्द ही 'मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना' की तर्ज पर पूरी तरह बीमा आधारित मॉडल पर ले जाने पर विचार कर रही है। सरकार का तर्क है कि इससे भ्रष्टाचार और योजना के दुरुपयोग पर लगाम लगेगी। हालांकि, लाभार्थी संघों का कहना है कि जब तक लंबित 560 करोड़ से अधिक के बकाये का भुगतान नहीं होता, तब तक किसी भी नए मॉडल का सफल होना मुश्किल है।