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April 04 2026 07:37 pm

इंडिया पोस्ट GDS भर्ती में उल्टा खेल,97 पदों के लिए सिर्फ 54 आवेदन, यूपी-बिहार के छात्र क्यों बना रहे दूरी

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News India Live, Digital Desk: भारतीय डाक विभाग (India Post) में ग्रामीण डाक सेवक (GDS) की भर्ती को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जहां आमतौर पर सरकारी नौकरी के एक पद के लिए हजारों दावेदार लाइन में होते हैं, वहीं डाक विभाग की इस विशेष भर्ती में 97 रिक्तियों के लिए मात्र 54 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य, जहां बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है, वहां से केवल 3 अभ्यर्थियों ने ही रुचि दिखाई है। आखिर क्यों युवाओं का मोहभंग इस भर्ती से हो रहा है?

हाई कट-ऑफ और 100% अंक वालों का दबदबा

GDS भर्ती में कम आवेदनों के पीछे का सबसे बड़ा कारण इसकी चयन प्रक्रिया और 'आसमान छूती' मेरिट लिस्ट को माना जा रहा है। GDS पदों पर चयन सीधे 10वीं के अंकों के आधार पर होता है। पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में कट-ऑफ 98% से लेकर 100% तक जा रहा है। ऐसे में औसत अंक (70-80%) प्राप्त करने वाले छात्रों ने अब आवेदन करना ही छोड़ दिया है, क्योंकि उन्हें पता है कि बिना 100% नंबर के लिस्ट में नाम आना नामुमकिन है।

ग्रामीण क्षेत्रों में काम का दबाव और कम वेतन

एक अन्य प्रमुख कारण वेतन और काम की परिस्थितियां हैं। ग्रामीण डाक सेवक को शुरुआती दौर में बेहद कम मानदेय (Stipend) मिलता है, जबकि उन्हें दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में जाकर काम करना होता है। शहरी युवाओं के लिए यह जॉब प्रोफाइल अब उतनी आकर्षक नहीं रह गई है। इसके अलावा, डाक विभाग द्वारा दी जाने वाली बुनियादी सुविधाओं की कमी और काम के बढ़ते बोझ ने भी अभ्यर्थियों को इस भर्ती से दूर कर दिया है। यूपी में मात्र 3 आवेदन आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि छात्र अब अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UP Police या SSC) की ओर अधिक रुख कर रहे हैं।

क्या बदल जाएगी चयन प्रक्रिया?

इस भर्ती अभियान के फ्लॉप होने के बाद अब विशेषज्ञ मांग कर रहे हैं कि डाक विभाग को अपनी चयन प्रक्रिया पर पुनर्विचार करना चाहिए। केवल 10वीं के अंकों के बजाय यदि कोई प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) आयोजित की जाए, तो सभी छात्रों को समान अवसर मिल सकेगा। वर्तमान प्रणाली में 'मार्क्स जिहाद' या कोरोना काल के प्रमोटेड छात्रों को मिलने वाले लाभ की वजह से योग्य उम्मीदवार पीछे छूट रहे हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे इन कम आवेदनों के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि भविष्य की भर्तियों में सुधार किया जा सके।