इजराइल-ईरान युद्ध पर खुलासा ओबामा, बुश और बाइडेन ने नेतन्याहू को रोका, लेकिन ट्रंप ने दी हमले की हरी झंडी
News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। अमेरिका के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी ने दावा किया है कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करने के लिए सालों से बेताब थे। इस योजना को अमेरिका के तीन पूर्व राष्ट्रपतियों जॉर्ज डब्लू बुश, बराक ओबामा और जो बाइडेन ने सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन अब डोनाल्ड ट्रंप के रुख ने पूरी बाजी पलट दी है।
तीन अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने क्यों कहा था 'नो'?
रिपोर्ट के मुताबिक, बुश, ओबामा और बाइडेन का मानना था कि ईरान पर सीधा हमला न केवल पूरे क्षेत्र को महायुद्ध में धकेल देगा, बल्कि इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था को भी अपूरणीय क्षति होगी। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बार-बार चेतावनी दी थी कि ईरान पर हमला करने से वह और अधिक आक्रामक हो जाएगा और परमाणु हथियार बनाने की अपनी कोशिशों को तेज कर देगा। इसी डर से पिछले दो दशकों में अमेरिका ने इजराइल को 'संयम' बरतने की सलाह दी थी।
ट्रंप की 'हां' ने बदली पूरी रणनीति
पूर्व अमेरिकी अधिकारी के दावों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू की युद्ध योजना पर सहमति जताकर सबको चौंका दिया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान के प्रभाव को कम करने के लिए 'अधिकतम दबाव' की नीति ही कारगर है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि यदि इजराइल अपनी सुरक्षा के लिए ईरान के सैन्य या परमाणु बुनियादी ढांचे को निशाना बनाता है, तो अमेरिका उसके साथ खड़ा रहेगा। इस बदलाव ने नेतन्याहू को वह 'ब्लैंक चेक' दे दिया है, जिसका वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
नेतन्याहू का 'ईरान मिशन' और संभावित खतरा
बेंजामिन नेतन्याहू हमेशा से ईरान को इजराइल के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते रहे हैं। अब ट्रंप के समर्थन के बाद यह आशंका बढ़ गई है कि इजराइल जल्द ही कोई बड़ा ऑपरेशन शुरू कर सकता है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठन भी पूरी ताकत के साथ युद्ध में कूद सकते हैं, जिससे इजराइल के लिए फ्रंटलाइन संभालना मुश्किल हो जाएगा।
दुनिया पर क्या होगा असर?
अगर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच यह समझौता धरातल पर उतरता है, तो वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा। रूस और चीन पहले ही ईरान के समर्थन में बयान दे चुके हैं। ऐसे में ईरान पर कोई भी हमला तीसरे विश्व युद्ध की आहट भी हो सकता है। फिलहाल, वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक की नजरें ट्रंप के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हैं।