आज का पंचांग: दूर्वा गणेश चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग! नोट करें गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त, भद्रा की समाप्ति और राहुकाल का सही समय
वैदिक ज्योतिष और पंचांग के अनुसार आज सावन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे 'दूर्वा विनायक चतुर्थी' (वरद चतुर्थी) के महापर्व के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है। आज का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ और दुर्लभ फलदायी बन गया है क्योंकि आज रविवार के दिन 'हस्त नक्षत्र' के संचरण से पूरे दिन-रात 'सर्वार्थ सिद्धि योग' और 'अमृत सिद्धि योग' का महासंयोग विद्यमान रहेगा। यह दिन विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश और प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य नारायण की संयुक्त कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
हालांकि, दिन के पूर्वार्ध में 'विष्टि करण' के कारण भद्रा का प्रभाव रहेगा, इसलिए मांगलिक और धार्मिक अनुष्ठानों को शुभ मुहूर्तों में ही संपन्न करना श्रेयस्कर होगा। आइए जानते हैं आज की तिथि, नक्षत्र, ग्रहों की स्थिति, चौघड़िया, राहुकाल और पूजा के संपूर्ण शुभ मुहूर्तों का प्रामाणिक विवरण।
आज का पंचांग और ग्रह-गोचर की खगोलीय स्थिति
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार आज विक्रम संवत 2083 (सिद्धार्थी संवत्सर) और शक संवत 1948 (पराभव) चल रहा है। आज सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा कन्या राशि में पूरे दिन-रात संचार कर रहे हैं।
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दिनांक: 16 अगस्त
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वार: रविवार (सूर्य देव का दिन)
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मास: श्रावण (पूर्णिमांत एवं अमांत दोनों)
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पक्ष: शुक्ल पक्ष
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तिथि: चतुर्थी तिथि शाम 04 बजकर 52 मिनट तक, इसके उपरांत पंचमी तिथि प्रारंभ होगी।
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नक्षत्र: हस्त नक्षत्र अगले दिन तड़के 03 बजकर 50 मिनट तक रहेगा, तत्पश्चात चित्रा नक्षत्र शुरू होगा।
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योग: साध्य योग अगले दिन सुबह 04 बजकर 07 मिनट तक, इसके बाद शुभ योग का आगमन होगा।
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करण: विष्टि (भद्रा) शाम 04 बजकर 52 मिनट तक, इसके बाद बव करण अगले दिन सुबह 04 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।
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सूर्योदय एवं सूर्यास्त: सूर्योदय प्रातः 05 बजकर 55 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 06 बजकर 55 मिनट पर होगा।
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चंद्रोदय एवं चंद्रास्त: चंद्रोदय सुबह 09 बजकर 18 मिनट पर और चंद्रास्त रात्रि 09 बजकर 06 मिनट पर होगा।
दूर्वा चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग का महासंयोग
आज के दिन का सबसे बड़ा आकर्षण दो प्रमुख शुभ योगों का एक साथ बनना है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रविवार को जब हस्त नक्षत्र का संयोग होता है, तो 'सर्वार्थ सिद्धि योग' और 'अमृत सिद्धि योग' का निर्माण होता है।
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सर्वार्थ सिद्धि योग: प्रातः 06 बजकर 07 मिनट से अगले दिन 17 अगस्त को तड़के 03 बजकर 50 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस योग में किए गए नए अनुबंध, व्यापारिक शुरुआत, प्रॉपर्टी या वाहन की खरीदारी और धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के सफल होते हैं।
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अमृत सिद्धि योग: प्रातः 06 बजकर 07 मिनट से अगले दिन तड़के 03 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। यह योग किसी भी कार्य में स्थायित्व और दीर्घकालिक सफलता प्रदान करता है।
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रवि योग एवं बुधादित्य प्रभाव: सूर्य के प्रभाव वाले रविवार को गणेश चतुर्थी का व्रत आरोग्यता और सरकारी कार्यों में विजय दिलाने वाला माना जाता है।
पूजा का सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त और अभिजीत काल
भगवान गणेश की पूजा और शुभ कार्यों को प्रारंभ करने के लिए दिन में कई अत्यंत फलदायी मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे:
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04 बजकर 19 मिनट से प्रातः 05 बजकर 07 मिनट तक (ध्यान, मंत्र जाप और आत्मचिंतन हेतु श्रेष्ठ)।
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक (दिन का सबसे शक्तिशाली शुभ मुहूर्त, जिसमें किसी भी नए कार्य की शुरुआत की जा सकती है)।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से दोपहर 03 बजकर 28 मिनट तक (कार्य सिद्धि के लिए उत्तम)।
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 06 बजकर 55 मिनट से सायं 07 बजकर 17 मिनट तक।
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अमृत काल: रात्रि 09 बजकर 43 मिनट से रात्रि 11 बजकर 21 मिनट तक।
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निशिता मुहूर्त: मध्यरात्रि 12 बजकर 03 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक।
दिन और रात के शुभ चौघड़िया मुहूर्त
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लाभ (शुभ समय): प्रातः 09 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक
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अमृत (सर्वोत्तम समय): प्रातः 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक
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शुभ (कल्याणकारी): दोपहर 02 बजकर 02 मिनट से 03 बजकर 40 मिनट तक
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शुभ (रात्रिकालीन चौघड़िया): सायं 06 बजकर 55 मिनट से रात्रि 08 बजकर 17 मिनट तक
भद्रा का साया और राहुकाल: अशुभ समय से रहें सावधान
शास्त्रों में भद्रा और राहुकाल के दौरान मांगलिक कार्यों, विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नवीन व्यवसाय के उद्घाटन को वर्जित माना गया है।
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भद्रा काल (विष्टि करण): आज सूर्योदय से लेकर शाम 04 बजकर 52 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा। हालांकि शास्त्रों के अनुसार कन्या राशि के चंद्रमा में भद्रा का निवास पाताल लोक में होता है, जिससे इसका दुष्परिणाम पृथ्वी पर न्यूनतम रहता है, फिर भी बड़े अनुबंधों में सावधानी बरतनी चाहिए।
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राहुकाल: सायं 05 बजकर 18 मिनट से सायं 06 बजकर 55 मिनट तक। इस समय किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत न करें और न ही यात्रा प्रारंभ करें।
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यमगण्ड काल: दोपहर 12 बजकर 25 मिनट से दोपहर 02 बजकर 03 मिनट तक।
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गुलिक काल: दोपहर 03 बजकर 40 मिनट से सायं 05 बजकर 18 मिनट तक।
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दुर्मुहूर्त: सायं 05 बजकर 11 मिनट से सायं 06 बजकर 03 मिनट तक।
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वर्ज्यम्: पूर्वाह्न 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 01 बजकर 36 मिनट तक।
दूर्वा विनायक चतुर्थी पूजा विधि और 21 दूर्वा का रहस्य
पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान गणेश ने अनलासुर नामक दैत्य को निगल लिया था, तब उनके उदर में भीषण दाह उत्पन्न हुई थी। महर्षि कश्यप ने 21 दूर्वा की गांठें बाप्पा को अर्पित कर उनके शरीर की जलन को शांत किया था। तभी से भगवान गणेश को दूर्वा अति प्रिय है।
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संकल्प और अभिषेक: प्रातः स्नान के बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। गणेश जी की प्रतिमा को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं।
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सिंदूर और दूर्वा अर्पण: भगवान को लाल चंदन, अक्षत और रोली का तिलक लगाएं। इसके बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का उच्चारण करते हुए 21 दूर्वा की गांठें (जोड़ों में) उनके चरणों और मस्तक पर अर्पित करें।
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मोदक और लड्डू का भोग: भगवान गणेश को बेसन के मोदक या बूंदी के लड्डुओं का नैवेद्य लगाएं।
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आरती और क्षमा प्रार्थना: अंत में संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें और सपरिवार गणेश आरती संपन्न करें।
रविवार और गणेश चतुर्थी का विशेष उपाय
आज रविवार होने के कारण तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, अक्षत और गुड़ मिलाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके साथ ही गणेश जी को दूर्वा के साथ एक सुपारी और हल्दी की गांठ अर्पित करने से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और नौकरी में पदोन्नति के योग बनते हैं।
दिशा शूल और यात्रा संबंधी नियम
आज रविवार होने के कारण पश्चिम दिशा में दिशा शूल रहेगा। इसलिए आज के दिन पश्चिम दिशा की लंबी यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि किसी अपरिहार्य कारणवश यात्रा करना अत्यंत आवश्यक हो, तो घर से निकलने से पहले दर्पण में अपना मुख देखकर अथवा थोड़ा सा घी या पान खाकर यात्रा प्रारंभ करें, जिससे यात्रा निर्विघ्न संपन्न हो सके।