अखंड सौभाग्य का पर्व हरतालिका तीज आज! पूजा में न छूट जाए एक भी सामान, यहाँ देखें पूरी और सटीक सामग्री लिस्ट
सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े और पवित्र व्रतों में शुमार हरतालिका तीज का पावन पर्व इस वर्ष यानी 2026 में बेहद खास उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस कठिन व्रत में माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाती है, ताकि सुहागिनों को अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और रातभर जागरण करके भगवान शिव और माता गौरी की आराधना करती हैं। पूजा की इस पूरी प्रक्रिया में यदि कोई जरूरी सामग्री छूट जाए तो मन में एक संशय बना रहता है, इसलिए सुहाग से जुड़ी हर एक वस्तु को समय पर जुटाना बेहद जरूरी होता है। आपकी पूजा पूरी तरह से निर्विघ्न और सफल हो, इसके लिए हम यहां हरतालिका तीज की संपूर्ण और विस्तृत पूजा सामग्री की लिस्ट लेकर आए हैं, जिसे नोट करके आप अपनी तैयारी पहले से पक्की कर सकती हैं।
भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर के साथ स्थापना सामग्री
हरतालिका तीज की पूजा का सबसे मुख्य नियम यह होता है कि इसमें भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की बालू यानी रेत या काली मिट्टी से बनाई गई मूर्तियों की पूजा की जाती है। यदि आप घर पर ही मिट्टी की मूर्तियां बना रही हैं, तो उसके लिए साफ और शुद्ध मिट्टी, चौकी, चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पीले रंग का नया वस्त्र, और भगवान को अर्पित करने के लिए कलावा या मौली की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, पूजा स्थल को सजाने के लिए आम के पत्ते, केले के खंभे या पत्ते, फूल और दूर्वा घास का होना भी बहुत अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि इनके बिना सनातन संस्कृति की कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है।
माता पार्वती के लिए सोलह श्रृंगार का पूरा सामान और सुहाग पिटारा
इस व्रत की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें माता पार्वती को सुहाग की सभी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं और वही आशीर्वाद व्रती महिला को भी प्राप्त होता है। सुहाग पिटारे में महावर, सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां (विशेषकर लाल या हरी कांच की चूड़ियां), आलता, काजल, मेहंदी, कंघी, शीशा, पायल, महावर, और नाक की कील या नथ जैसी सोलह श्रृंगार की चीजें शामिल होनी चाहिए। इसके साथ ही माता गौरी को अर्पित करने के लिए एक सुहागन के जोड़े के रूप में साड़ी या चुनरी भी जरूर रखी जाती है, जिसे पूजा के बाद किसी सुहागिन ब्राह्मण महिला या जरूरतमंद को दान देना बहुत शुभ माना जाता है।
फल, फूल, पंचामृत और नैवेद्य की आवश्यक सामग्रियां
भगवान शिव और माता पार्वती को प्रसन्न करने के लिए ऋतु फल (जैसे केला, सेब, अमरूद, और नारियल) का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा, पूजा के दौरान अभिषेक और नैवेद्य के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत, शुद्ध देसी घी का दीपक, कपूर, अगरबत्ती, धूपबत्ती, और माचिस की डिब्बी साथ रखें। भोग के लिए घर पर बनी हुई शुद्ध मिठाइयां, खीर या हलवा तैयार किया जाता है। पूजा में चढ़ाने के लिए जनेऊ, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, और कलावा भी पर्याप्त मात्रा में पास रखना चाहिए ताकि पूजा के बीच में किसी भी सामान के लिए उठना न पड़े।
बेलपत्र, धतूरा और शिव जी को प्रिय अन्य सामग्रियां
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, और भस्म अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए हरतालिका तीज की पूजा में इन सामग्रियों का होना सबसे जरूरी है। बेलपत्र कहीं से भी खंडित या फटे हुए नहीं होने चाहिए, और उन पर चंदन से 'राम' या 'ॐ' लिखकर अर्पित करना और भी ज्यादा फलदायी माना जाता है। इसके अलावा, शमी के पत्ते, मदार के फूल और सफेद या पीले रंग के सुगंधित पुष्प माता पार्वती और शिव जी को समर्पित किए जाते हैं। इन सभी पवित्र चीजों को एक साथ व्यवस्थित करके रखने से पूजा का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और अनुशासित हो जाता है।
हरतालिका तीज व्रत के नियम और पूजा संपन्न करने की विधि
व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके सोलह श्रृंगार किया जाता है और मन में माता गौरी का ध्यान करके निर्जला व्रत का संकल्प लिया जाता है। प्रदोष काल के समय यानी शाम के वक्त शुभ मुहूर्त में पूजा की चौकी सजाकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की स्थापना की जाती है। इसके बाद षोडशोपचार विधि से भगवान की पूजा की जाती है, जिसमें माता पार्वती को सुहाग की चीजें और शिव जी को बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। पूरी रात जागरण करके भजन-कीर्तन करने का विधान है और अगले दिन सुबह आरती के बाद माता को चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है।