इस तारीख से बदलने जा रही है ब्रह्मांड की ईश्वरीय सत्ता, अगले 4 महीने सिर्फ महादेव के हाथ में होगी पूरी दुनिया की कमान

इस तारीख से बदलने जा रही है ब्रह्मांड की ईश्वरीय सत्ता, अगले 4 महीने सिर्फ महादेव के हाथ में होगी पूरी दुनिया की कमान

सनातन धर्म और वैदिक ज्योतिष में चतुर्मास के प्रारंभ को ब्रह्मांडीय ऊर्जा और ईश्वरीय सत्ता में बदलाव का एक बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण काल माना जाता है। इस वर्ष देवशयनी एकादशी के पावन अवसर से चार महीनों के लिए पूरी सृष्टि की व्यवस्था और संचालन का नियम बदलने जा रहा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों के दौरान भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसके बाद इस पूरी सृष्टि के संचालन, पालन और संहार का पूरा उत्तरदायित्व देवों के देव महादेव संभालते हैं। इस दौरान पूरी दुनिया भगवान शिव के चरणों में नतमस्तक रहती है।

देवशयनी एकादशी से शुरू होगी शिव सत्ता: जानिए क्या है इसका आध्यात्मिक महत्व

चतुर्मास का आरंभ आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से होता है, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन से लेकर कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लग जाती है। इस अवधि में भगवान शिव ही सृष्टि के एकमात्र नियंता बन जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस समय में ब्रह्मांड में आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है, इसलिए इस काल में किया गया जप, तप और दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

भगवान शिव ही होंगे पालक और संहारक: सावन और भादो में साधना का महासंयोग

इन चार महीनों के दौरान श्रावण (सावन), भाद्रपद (भादो), आश्विन और कार्तिक मास आते हैं। इसमें सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है। चूंकि महादेव इस काल में सृष्टि के पालक की भूमिका में भी होते हैं, इसलिए उनकी पूजा से भक्तों के जीवन के सभी कष्ट, रोग और आर्थिक तंगियां तुरंत दूर हो जाती हैं। वहीं संहारक रूप में वह हमारे भीतर की नकारात्मकता, अहंकार और पापों का नाश करते हैं। यही वजह है कि देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में इस दौरान भक्तों का तांता लगा रहता है।

चतुर्मास में क्या करें और क्या न करें: इन कड़े नियमों का पालन है जरूरी

इस पावन काल में साधकों और आम लोगों के लिए आयुर्वेद और शास्त्रों में कुछ कड़े नियम बताए गए हैं। चतुर्मास के दौरान सात्विक जीवन शैली अपनाना अनिवार्य है। इन चार महीनों में तामसिक भोजन, लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। साथ ही सावन में हरी सब्जियां, भादो में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दालों का त्याग करना स्वास्थ्य और धार्मिक दृष्टि से उत्तम माना गया है। इस दौरान भूमि पर शयन करना, ब्रह्मचर्य का पालन करना और निरंतर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना भाग्य के बंद दरवाजे खोल देता है।

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