क्या है आंख से ओझल दुश्मन को ढेर करने वाली BVRAAM तकनीक? इंडोनेशिया खरीद रहा भारत की 'अस्त्र' मिसाइल, जानिए इसकी खौफनाक ताकत

क्या है आंख से ओझल दुश्मन को ढेर करने वाली BVRAAM तकनीक? इंडोनेशिया खरीद रहा भारत की 'अस्त्र' मिसाइल, जानिए इसकी खौफनाक ताकत

वैश्विक रक्षा बाजार (Global Defence Market) में भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। ब्रह्मोस (BrahMos) और आकाश (Akash) मिसाइल सिस्टम के सफल निर्यात के बाद अब भारत की एक और घातक मिसाइल दुनिया में तहलका मचाने को तैयार है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया ने भारत में पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित 'अस्त्र मार्क-1' (Astra Mk1) मिसाइल को अपने लड़ाकू विमानों के बेड़े में शामिल करने के लिए बड़ी दिलचस्पी दिखाई है। यह मिसाइल आधुनिक युग की सबसे खतरनाक तकनीकों में से एक 'बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल' (BVRAAM) से लैस है, जो दुश्मन को बिना देखे ही मलबे में तब्दील करने की क्षमता रखती है।

क्या होती है बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVRAAM) तकनीक?

रक्षा विज्ञान की भाषा में बियॉन्ड विजुअल रेंज (Beyond Visual Range) का सीधा मतलब है 'आंखों की नजर से बिल्कुल दूर'। पारंपरिक हवाई लड़ाइयों में पायलटों को दुश्मन के विमान को देखकर निशाना लगाना पड़ता था, लेकिन BVRAAM तकनीक आ जाने के बाद अब लड़ाकू विमान 37 किलोमीटर से लेकर 100 किलोमीटर से भी ज्यादा की दूरी पर मौजूद दुश्मन के फाइटर जेट को आसानी से मलबे में तब्दील कर सकते हैं। यह तकनीक अत्याधुनिक रडार ट्रैकिंग, कंप्यूटर गाइडेंस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (Inertial Navigation System) पर काम करती है, जिससे दागी गई मिसाइल हवा में अपना रास्ता बदलते हुए भाग रहे दुश्मन के विमान का पीछा करके उसे नेस्तनाबूत कर देती है।

DRDO की अस्त्र मार्क-1 की खौफनाक ताकत और खूबियां

अस्त्र मार्क-1 मिसाइल को भारत की शीर्ष रक्षा अनुसंधान संस्था डीआरडीओ (DRDO) ने विकसित किया है। यह भारत की पहली पूरी तरह से स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 110 किलोमीटर से भी अधिक है, और यह आवाज की रफ्तार से चार गुना ज्यादा यानी करीब 4.5 मैक (Mach) की सुपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरती है। इसका सीधा मतलब यह है कि दुश्मन के विमान को संभलने या चकमा देने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिलता। यह मिसाइल हर मौसम में, दिन हो या रात, दुश्मन के सुपर-मैन्यूवरेबल (तेजी से मुड़ने वाले) लड़ाकू विमानों और ड्रोनों को मार गिराने में पूरी तरह सक्षम है।

इंडोनेशिया क्यों खरीदना चाहता है भारत की अस्त्र मिसाइल?

इंडोनेशियाई वायुसेना (TNI-AU) के पास इस समय रूस के सुखोई (Sukhoi) और अमेरिका के F-16 जैसे बेहतरीन लड़ाकू विमान मौजूद हैं। इंडोनेशिया अपने बेड़े की मारक क्षमता को आधुनिक और पश्चिमी प्रतिबंधों से मुक्त बनाने के लिए एक ऐसी मिसाइल की तलाश में था जो बेहतरीन होने के साथ-साथ किफायती भी हो। भारत की अस्त्र मार्क-1 मिसाइल तकनीकी रूप से दुनिया की सबसे महंगी मिसाइलों जैसे कि अमेरिका की 'एमराम' (AMRAAM) और यूरोप की 'मीटियर' (Meteor) को कड़ी टक्कर देती है, लेकिन इसकी कीमत उनकी तुलना में काफी कम है। इंडोनेशिया इस मिसाइल को अपने बेड़े में शामिल कर दक्षिण चीन सागर (South China Sea) के भौगोलिक समीकरणों में अपनी रणनीतिक स्थिति को बेहद मजबूत करना चाहता है।

भारत के 'मेक इन इंडिया' और डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए बड़ा बूस्टर डोज़

इंडोनेशिया के साथ होने जा रही इस संभावित अस्त्र मिसाइल डील को भारत के रक्षा निर्यात (Defence Export) के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। यह सौदा न केवल भारत की 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' नीति की सफलता को दर्शाता है, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत अब केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं बल्कि दुनिया को अत्याधुनिक तकनीक बेचने वाला ग्लोबल डिफेंस हब बन चुका है। भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होते ये भौगोलिक और कूटनीतिक संबंध आने वाले दिनों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की नई दिशा तय करेंगे।

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