Aaj Ka Panchang: कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा का बना महासंयोग; सर्वार्थ सिद्धि योग में करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और पंचांग
आज आश्विन मास (अथवा भाद्रपद शुक्ल पक्ष) के संधिकाल में सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर अपनी मित्र राशि कन्या में प्रवेश कर रहे हैं, जिसे कन्या संक्रांति कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में कन्या संक्रांति का दिन शिल्प कला, निर्माण, विज्ञान और तकनीकी के आदि शिल्पी भगवान विश्वकर्मा के प्राकट्य दिवस यानी विश्वकर्मा पूजा के रूप में मनाया जाता है।
इस वर्ष विश्वकर्मा जयंती पर एक बेहद दुर्लभ और फलदायी संयोग बना है। आज के दिन नक्षत्र और वार के विशेष मेल से सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू किया गया कोई भी नया व्यवसाय, फैक्ट्री का शुभारंभ, नई मशीन की स्थापना या वाहन की खरीद दीर्घकालिक लाभ, स्थायित्व और चौतरफा सफलता प्रदान करती है।
आज का दैनिक पंचांग (17 सितंबर)
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संवत एवं मास: विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948
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तिथि: शुक्ल पक्ष की षष्ठी/सप्तमी तिथि
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वार: गुरुवार (बृहस्पतिवार)
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नक्षत्र: अनुराधा / पुष्य नक्षत्र प्रभाव
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योग: प्रीति योग उपरांत आयुष्मान योग
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करण: गर और वणिज
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सूर्य राशि: सिंह राशि से कन्या राशि में गोचर (कन्या संक्रांति)
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चंद्र राशि: वृश्चिक राशि (या गोचर अनुसार)
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय
| घटना | समय |
| सूर्योदय | सुबह 06:07 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 06:24 बजे |
| चंद्रोदय | सुबह 11:15 बजे |
| चंद्रास्त | रात 10:48 बजे |
विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति का सबसे शुभ मुहूर्त
कल-कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों और तकनीकी दफ्तरों में औजारों, कम्प्यूटरों और भारी मशीनों के पूजन के लिए आज कई शुभ चौघड़िया और लग्न मुहूर्त उपलब्ध हैं:
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कन्या संक्रांति पुण्य काल: सुबह 06:15 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक (दान, स्नान और जप के लिए सर्वोत्तम)
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कन्या संक्रांति महापुण्य काल: सुबह 06:15 बजे से सुबह 08:25 बजे तक
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विश्वकर्मा पूजा का श्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक
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सर्वार्थ सिद्धि योग काल: दोपहर 01:22 बजे से अगले दिन प्रातःकाल तक
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अमृत चौघड़िया (पूजा के लिए अति उत्तम): दोपहर 02:00 बजे से दोपहर 03:32 बजे तक
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शुभ चौघड़िया: सुबह 06:07 बजे से सुबह 07:39 बजे तक
आज के अशुभ काल: इस दौरान न करें कोई नया कार्य
किसी भी नए व्यापारिक सौदे, मशीन की पहली बार टेस्टिंग या नए अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले राहुकाल और अन्य अशुभ समय का त्याग करना शास्त्रसम्मत माना जाता है:
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राहुकाल: दोपहर 01:48 बजे से दोपहर 03:20 बजे तक (इस दौरान पूजा या शुभ कार्य प्रारंभ करने से बचें)
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यमगंड काल: सुबह 06:07 बजे से सुबह 07:39 बजे तक
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गुलिक काल: सुबह 09:11 बजे से सुबह 10:43 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: सुबह 10:13 बजे से सुबह 11:02 बजे तक
विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति पर क्या करें विशेष?
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मशीनों का तिलक व विश्राम: अपने कार्यस्थल की सभी मशीनों, तकनीकी उपकरणों और दोपहिया-चारपहिया वाहनों को अच्छी तरह साफ करें। उन पर हल्दी, रोली और चंदन से स्वस्तिक चिन्ह बनाएं और रक्षासूत्र (मौली) बांधें।
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संक्रांति दान का महत्व: कन्या संक्रांति के पावन अवसर पर तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और अक्षत डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। इसके उपरांत किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को मौसमी फल, पीले वस्त्र, तिल, गुड़ और कांसे या तांबे के बर्तन का दान करें।
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कारीगरों और श्रमिकों का सम्मान: भगवान विश्वकर्मा श्रम साधकों में वास करते हैं, इसलिए आज के दिन अपने अधीन काम करने वाले कारीगरों, तकनीशियनों, ड्राइवरों और मजदूरों को उपहार, मिष्ठान्न और यथोचित पारिश्रमिक देकर उनका सम्मान अवश्य करें।