हरतालिका तीज पर करें इस पौराणिक कथा का पाठ, वैवाहिक जीवन में बनी रहेगी सुख-समृद्धि
हरतालिका तीज का पावन पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए साल के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है, जिसमें माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान के साथ उपासना की जाती है। इस विशेष दिन पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। इस व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा का बहुत बड़ा महत्व है, जिसे हर व्रती महिला को पूजा के दौरान जरूर सुनना या पढ़ना चाहिए।
#हरतालिका तीज व्रत कथा और उसका पौराणिक महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर जंगल में कठिन तपस्या की थी। उन्होंने अन्न और जल का त्याग करके केवल सूखे पत्तों को खाकर साधना की थी, जिससे उनकी स्थिति बहुत नाजुक हो गई थी। माता पार्वती के पिता हिमालय अपनी पुत्री की इस कठिन तपस्या को देखकर बहुत चिंतित थे और वे उनका विवाह भगवान विष्णु से तय करना चाहते थे। जब माता पार्वती को इस बात का पता चला, तो उन्होंने अपनी सखियों से इस बात की चर्चा की और अपनी व्यथा सुनाई। इसके बाद उनकी सखियां उन्हें एक गुप्त और घने जंगल में ले गईं ताकि उनके पिता उन्हें ढूंढ न सकें। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन हस्त नक्षत्र में माता पार्वती ने रेत से एक शिवलिंग का निर्माण किया और पूरी रात जागरण करते हुए भगवान शिव की आराधना की। उनकी इस कठोर तपस्या और अचल भक्ति से प्रसन्न होकर भोलेनाथ प्रकट हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।
#भगवान शिव ने माता पार्वती को बताया व्रत का पूरा लाभ
इस व्रत की कथा के दौरान जब माता पार्वती ने भगवान शिव से इस उपवास के फल और महत्व के बारे में पूछा, तब भोलेनाथ ने विस्तार से इसके लाभ बताए थे। भगवान शिव ने स्पष्ट किया कि जो भी सुहागिन स्त्री या कन्या पूरी निष्ठा, श्रद्धा और विधि-विधान के साथ हरतालिका तीज का व्रत रखती है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शिवजी ने बताया कि इस व्रत को करने वाली महिलाओं को इस लोक में सभी प्रकार के भौतिक सुख और ऐश्वर्य मिलते हैं तथा अंत में उन्हें शिवलोक में स्थान प्राप्त होता है। भगवान शिव ने यह भी कहा कि इस व्रत के प्रभाव से पति-पत्नी के बीच का आपसी प्रेम और विश्वास हमेशा अटूट रहता है तथा परिवार में कभी भी क्लेश या धन-धान्य की कमी नहीं होती है। इस व्रत को करने से अनजाने में हुए पाप भी नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
#व्रत के दौरान किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान
हरतालिका तीज का व्रत अन्य व्रतों की तुलना में इसलिए भी कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग किया जाता है। व्रत के नियमों के अनुसार एक बार यदि यह उपवास शुरू कर दिया जाए, तो इसे बीच में छोड़ा नहीं जाता है। हर साल इसे पूरी नियम-निष्ठा के साथ निरंतर रखना पड़ता है। पूजा के समय शाम के वक्त प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान शिव की षोडशोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही रात्रि में जागरण करना और भजन-कीर्तन करना इस व्रत का मुख्य अंग माना गया है। अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान करने और पूजा-पाठ संपन्न करने के बाद ही व्रती महिलाओं को अन्न और जल ग्रहण करके अपना व्रत खोलना चाहिए।