2 गलतियां करते हुए पकड़ा गया ये को-ऑपरेटिव बैंक! नोटिस मिलने पर दी लंबी-चौड़ी सफाई; नहीं माना RBI, ठोक दी भारी पेनाल्टी

2 गलतियां करते हुए पकड़ा गया ये को-ऑपरेटिव बैंक! नोटिस मिलने पर दी लंबी-चौड़ी सफाई; नहीं माना RBI, ठोक दी भारी पेनाल्टी

देश के बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार कड़े कदम उठा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर कामकाज करने वाले शहरी सहकारी बैंकों (Urban Co-operative Banks) पर केंद्रीय बैंक की निगरानी बेहद सख्त हो चुकी है। इसी कड़ी में एक और को-ऑपरेटिव बैंक केंद्रीय बैंक के रडार पर आ गया, जहां ऑडिट और जांच के दौरान दो गंभीर विनियामक उल्लंघन (Regulatory Violations) पकड़े गए।

आरबीआई द्वारा बैंक को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी कर जवाब तलब किया गया था। बैंक प्रबंधन ने अपनी तरफ से लिखित स्पष्टीकरण दिया और व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) के दौरान खूब दलीलें पेश कीं। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक बैंक की सफाई से संतुष्ट नहीं हुआ और नियमों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए बैंक पर भारी मौद्रिक जुर्माना (Monetary Penalty) ठोक दिया।

किन 2 बड़ी गलतियों में फंसा को-ऑपरेटिव बैंक?

केंद्रीय बैंक द्वारा किए गए वैधानिक निरीक्षण (Statutory Inspection) और वित्तीय स्थिति के मूल्यांकन के दौरान बैंक के कामकाज में दो प्रमुख खामियां उजागर हुईं:

  • 1. एक्सपोजर नॉर्म्स और लेंडिंग लिमिट्स का उल्लंघन:

    सहकारी बैंकों के लिए आरबीआई का स्पष्ट नियम है कि वे किसी एकल उधारकर्ता (Single Borrower) या समूह को बैंक की पूंजीगत निधि (Capital Funds) के एक तय प्रतिशत से अधिक का कर्ज या वित्तीय गारंटी नहीं दे सकते। जांच में पाया गया कि बैंक ने निर्धारित विवेकपूर्ण सीमा (Prudential Limits) को पार करते हुए स्वीकृत सीमा से अधिक लोन बांटे, जिससे बैंक की पूंजी पर सीधा जोखिम बढ़ गया।

  • 2. केवाईसी (KYC) और अनक्लेम्ड डिपॉजिट ट्रांसफर में लापरवाही:

    बैंक ने अपने कई बड़े खातों में 'नो योर कस्टमर' (KYC) नियमों के अपडेशन और आवधिक समीक्षा में गंभीर कोताही बरती। इसके साथ ही 10 वर्ष से अधिक समय से निष्क्रिय पड़े खातों की धनराशि को समय पर आरबीआई के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEA Fund) में ट्रांसफर करने के तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

बैंक ने दी लंबी सफाई, लेकिन क्यों खारिज कर दी RBI ने दलील?

आरबीआई द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद बैंक के शीर्ष प्रबंधन ने दलील दी कि यह तकनीकी खामियों (System Glitches) और कर्मचारियों की अनजाने में हुई चूक के कारण हुआ था, और इससे बैंक की वित्तीय सेहत या किसी खाताधारक को कोई सीधा आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचा है।

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि विनियामक अनुपालन (Regulatory Compliance) में किसी भी प्रकार की ढिलाई को तकनीकी बहाना बनाकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 (Banking Regulation Act, 1949) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए आरबीआई ने बैंक पर मौद्रिक जुर्माना लगाने का अंतिम आदेश जारी कर दिया।

क्या खाताधारकों और आम ग्राहकों के पैसों पर पड़ेगा कोई असर?

इस तरह की कार्रवाई के बाद अक्सर बैंक के ग्राहकों में अपने जमा पैसों और खातों की सुरक्षा को लेकर घबराहट फैल जाती है। इस संबंध में आरबीआई ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की है:

  • ग्राहकों के पैसे पूरी तरह सुरक्षित: यह कार्रवाई पूरी तरह से बैंक द्वारा वैधानिक नियमों के अनुपालन में की गई विफलता पर आधारित है।

  • रोजमर्रा के लेन-देन पर कोई रोक नहीं: यह किसी प्रकार का प्रतिबंध (Moratorium) नहीं है। बैंक के ग्राहकों के खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), एटीएम निकासी या रोजमर्रा की बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

  • लेन-देन की वैधता बरकरार: बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी वैध समझौते या ट्रांजेक्शन की वैधता पर इस जुर्माने का कोई प्रभाव नहीं है।

केंद्रीय बैंक ने सभी सहकारी और वाणिज्यिक बैंकों को पुनः चेतावनी दी है कि वे जोखिम प्रबंधन, ऋण आवंटन सीमा और ग्राहक सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा भविष्य में और भी कठोर दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।