गणेश चतुर्थी 2026 पर बप्पा को भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें, दूर्वा और मोदक समेत इन 7 चीजों से घर में बरसेगी असीम कृपा
विघ्नहर्ता भगवान गणेश के स्वागत और उनके जन्मोत्सव का पावन पर्व गणेश चतुर्थी इस वर्ष यानी 2026 में बेहद खास संयोग के साथ पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाने वाला है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाले इस दस दिवसीय महाउत्सव के दौरान हर घर, गली और पंडाल में 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठता है। मान्यता है कि जो भी भक्त इन दस दिनों तक सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान के साथ गणेश जी की पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। गणेश उत्सव के इन पवित्र दिनों में भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए उन्हें कुछ विशेष चीजें अर्पित करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है, जिन्हें चढ़ाने से बप्पा अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
भगवान गणेश को अति प्रिय है दूर्वा घास और इसे अर्पित करने का सही नियम
गणेश पूजा में दूर्वा (Durbha Grass) का होना सबसे अनिवार्य माना जाता है, क्योंकि बिना दूर्वा के बप्पा की कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, दूर्वा में अमृत का वास होता है और इसे भगवान गणेश को चढ़ाने से उनके शरीर की उष्णता शांत होती है। हमेशा ध्यान रखें कि बप्पा को हमेशा तीन या पांच पत्तियों वाली हरी दूर्वा ही अर्पित करनी चाहिए, जिसे 'दुर्वांकुर' कहा जाता है। इसे हमेशा भगवान के चरणों में या उनके मस्तक पर रखा जाता है, कभी भी उनके पैरों पर नहीं। साफ-सुथरी और बिना किसी खंडित या गंदे स्थान से तोड़ी गई दूर्वा को यदि आप बप्पा को समर्पित करते हैं, तो वे आपके समस्त विघ्न और बाधाओं को दूर करके आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
मोदक का भोग और बप्पा की प्रसन्नता का रहस्य
जब भी भगवान गणेश की बात आती है, तो उनके प्रिय भोग के रूप में 'मोदक' (Modak) का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। मोदक को बप्पा का सबसे पसंदीदा मिष्ठान माना जाता है, और इसीलिए गणेश चतुर्थी के इन दस दिनों में उन्हें रोजाना या विशेष अवसरों पर 21 मोदक का भोग जरूर लगाया जाता है। चावल के आटे या मैदे से बने और अंदर नारियल-गुड़ के मिश्रण से भरे हुए भाप में पकाए गए मोदक जब बप्पा को अर्पित किए जाते हैं, तो वे प्रसन्न होकर अपने भक्तों को रिद्धि-सिद्धि और ऐश्वर्य का वरदान देते हैं। आप चाहें तो बेसन के लड्डू या मोदक का भोग भी लगा सकते हैं, क्योंकि मीठे और स्वादिष्ट पकवानों से विघ्नहर्ता का दरबार हमेशा भरा रहता है।
लाल रंग के फूल और सिंदूर का महत्व
गणेश जी को लाल रंग की वस्तुएं अत्यधिक प्रिय हैं, इसलिए उनकी पूजा में लाल गेंदा, गुड़हल या कमल के फूलों का विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि सिंदूर उनके साहस, मंगल और सौभाग्य का प्रतीक है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित करते समय 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। यह उपाय आपके जीवन से हर प्रकार के भय और नकारात्मकता को दूर करता है तथा करियर, व्यापार और परिवार में उन्नति के नए मार्ग खोलता है।
केला, मोदक और अन्य पांच चीजें जो लाती हैं घर में बरकत
दूर्वा और मोदक के अलावा पांच ऐसी और चीजें हैं जिन्हें गणेश चतुर्थी पर बप्पा को चढ़ाने से कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। इन सात चीजों में दूर्वा, मोदक, लाल फूल, सिंदूर, जनेऊ (पवित्र सूत्र), मोदक या लड्डू के साथ-साथ केले का जोड़ा (फलों का भोग) और दूर्वा की गांठ शामिल हैं। केले का फल हमेशा जोड़े में चढ़ाया जाता है, जो जोड़े के रूप में सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इन सभी पवित्र सामग्रियों को विधि-विधान से गणेश जी को अर्पित करने से घर में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश दोनों का संयुक्त आशीर्वाद बना रहता है, जिससे आर्थिक तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।
विघ्नहर्ता की आराधना और गणेशोत्सव का आध्यात्मिक संदेश
गणेश चतुर्थी का यह महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमें यह सिखाता है कि जीवन में आने वाली हर मुश्किल का सामना कैसे मुस्कान के साथ किया जाए। इन दस दिनों में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करके और उनकी निरंतर सेवा करके हम अपने मन के अहंकार, क्रोध और बुराइयों का विसर्जन करते हैं। जब अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा का विसर्जन किया जाता है, तो यह संदेश मिलता है कि जो इस धरती पर आया है उसे एक दिन अपने लोक लौटना है, लेकिन उनका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहता है। आप भी इस गणेश चतुर्थी पर इन सात विशेष चीजों को बप्पा को अर्पित करें और अपने घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का स्वागत करें।