18 सितंबर से मंगल का गोचर और नीचभंग राजयोग: संपत्ति विवाद और बुजुर्गों की सेहत पर असर; इन 4 राशियों की बढ़ेंगी मुश्किलें, रहें सावधान
वैदिक ज्योतिष में साहस, ऊर्जा, पराक्रम, भूमि और रक्त के कारक ग्रह 'मंगल' का गोचर अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। पंचांगीय गणना के अनुसार, 18 सितंबर को मंगल मिथुन राशि से निकलकर जल तत्व की राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश करेंगे।
ज्योतिष शास्त्र में कर्क राशि को मंगल की 'नीच राशि' (Debilitated Sign) माना गया है, जहां मंगल अपने स्वाभाविक बल और आक्रामकता को संतुलित नहीं रख पाते। हालांकि, कुंडली में चंद्रमा या बृहस्पति की विशेष स्थिति अथवा दृष्टि संबंध के चलते इस गोचर के दौरान 'नीचभंग राजयोग' (Neechbhang Rajyoga) की स्थिति भी आकार लेगी। नीचभंग राजयोग अंततः संघर्षों के बाद विजय तो दिलाता है, लेकिन शुरुआत में यह भारी उथल-पुथल, मानसिक अशांति और पारिवारिक तनाव का कारण बनता है।
गोचर का सामान्य प्रभाव: भूमि विवाद और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर साया
मंगल के इस गोचर का प्रभाव विशेष रूप से दो बड़े क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा:
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पैतृक संपत्ति और भूमि-भवन विवाद: मंगल भूमि और अचल संपत्ति के कारक हैं, जबकि कर्क राशि चौथा भाव (गृह, सुख और माता का स्थान) मानी जाती है। ऐसे में पारिवारिक संपत्तियों, बंटवारे, रजिस्ट्री या जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में अचानक तनाव और कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है।
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माता व बुजुर्गों की सेहत: घर के वरिष्ठ सदस्यों, विशेषकर माता या बुजुर्ग परिजनों के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। सीने में संक्रमण, फेफड़े, हृदय संबंधी समस्या और रक्तचाप (BP) में उतार-चढ़ाव को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
इन 4 राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा समय, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
मंगल का यह नीच राशि गोचर प्रमुख रूप से चार राशियों के जातकों की परीक्षा ले सकता है:
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1. मेष राशि (Aries):
मेष राशि के स्वामी खुद मंगल हैं और वे आपकी राशि से चौथे भाव (सुख भाव) में गोचर करेंगे।
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माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
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नया वाहन या मकान खरीदते समय दस्तावेजों की गहन जांच करें, जल्दबाजी में किया गया सौदा नुकसान करा सकता है।
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कार्यक्षेत्र के तनाव को घर पर न लाएं, अन्यथा दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है।
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2. मिथुन राशि (Gemini):
मिथुन राशि के जातकों के लिए मंगल दूसरे भाव (धन और वाणी भाव) में रहेंगे।
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आपकी तीखी या आक्रामक वाणी परिवार के सदस्यों के साथ बड़े मतभेद का कारण बन सकती है।
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वित्तीय मामलों में उधार देने या बिना सोचे-समझे बड़े जोखिम भरे निवेश से बचें।
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खान-पान में लापरवाही से पेट और दांतों से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
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3. कर्क राशि (Cancer):
मंगल आपकी ही राशि के लग्न (प्रथम भाव) में नीचस्थ होकर विराजमान होंगे।
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स्वभाव में अचानक गुस्सा, चिड़चिड़ापन और अधीरता बढ़ सकती है, जिस पर नियंत्रण रखना अनिवार्य होगा।
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वैवाहिक जीवन और पार्टनरशिप के काम में गलतफहमियां उभर सकती हैं।
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गाड़ी चलाते समय पूरी सतर्कता बरतें और चोट-चपेट या रक्त विकार से बचाव रखें।
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4. मकर राशि (Capricorn):
मकर राशि के जातकों के लिए मंगल सातवें भाव (दाम्पत्य और साझेदारी भाव) में गोचर करेंगे और लग्न पर सीधी दृष्टि डालेंगे।
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जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ सकते हैं; अहंकार के टकराव से बचें।
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साझेदारों (Business Partners) के साथ लेन-देन को पूरी तरह लिखित और पारदर्शी रखें।
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कानूनी या कोर्ट-कचहरी के मामलों में कोई भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
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अशुभ प्रभाव से बचाव के 5 आसान ज्योतिषीय उपाय
यदि आपकी कुंडली में मंगल की प्रतिकूल दशा चल रही है या गोचर से परेशानी का अंदेशा हो, तो इन उपायों को अपनाएं:
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हनुमान चालीसा का नियमित पाठ: प्रतिदिन सुबह और शाम हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें।
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तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य: सुबह तांबे के पात्र में जल, रोली और लाल फूल डालकर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
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मंगलवार को दान: मंगलवार के दिन मसूर की दाल, लाल वस्त्र या गुड़ का दान किसी जरूरतमंद को करें।
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क्रोध पर नियंत्रण: निर्णय लेते समय भावुकता या अत्यधिक आक्रामकता से बचें और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
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रक्तदान: यदि स्वास्थ्य अनुमति दे, तो स्वेच्छा से रक्तदान करें; इससे मंगल के नकारात्मक रक्त-संबंधी दोष शांत होते हैं।