Karwa Chauth 2026: 29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का अखंड निर्जला व्रत, 13 घंटे 46 मिनट की कठिन साधना; जानें शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth 2026: 29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का अखंड निर्जला व्रत, 13 घंटे 46 मिनट की कठिन साधना; जानें शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त

सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, दांपत्य प्रेम और पति की दीर्घायु की कामना का महापर्व 'करवा चौथ' (Karwa Chauth) सनातन संस्कृति में आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और विश्वास का पावन संकल्प है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से पूर्व सरगी ग्रहण कर पूरे दिन अन्न और जल की एक बूंद भी ग्रहण किए बिना कठोर निर्जला व्रत रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने व छलनी से पति का मुख देखने के बाद ही व्रत का पारण करती हैं। साल 2026 में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। खगोलीय और पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष करवा चौथ का निर्जला व्रत लगभग 13 घंटे 46 मिनट तक चलेगा, जो सुबह सूर्योदय के साथ शुरू होकर रात में चंद्र दर्शन और अर्घ्य के साथ संपन्न होगा। आइए वैदिक पंचांग के आधार पर चतुर्थी तिथि, शाम की पूजा का सटीक मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और व्रत खोलने के आवश्यक नियम विस्तार से जानते हैं।

29 अक्टूबर 2026: चतुर्थी तिथि का प्रारंभ और समापन काल

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ का व्रत उस दिन रखा जाता है जब शाम को प्रदोष काल और चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान हो। साल 2026 में चतुर्थी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा:

  • कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मध्यरात्रि 01:06 बजे से।

  • कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि का समापन: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रात 10:09 बजे पर।

  • उदया तिथि और चंद्र दर्शन: चूंकि 29 अक्टूबर को पूरे दिन उदया तिथि रहेगी और रात में चंद्रोदय के समय भी चतुर्थी तिथि प्रभावी रहेगी, इसलिए देश भर में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर (गुरुवार) को ही सर्वमान्य रूप से मनाया जाएगा।

13 घंटे 46 मिनट का उपवास काल: सुबह से रात तक का समय

करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला रखा जाता है:

  • व्रत (उपवास) प्रारंभ समय: सुबह 06:31 बजे (सूर्योदय)।

  • व्रत समाप्ति (चंद्रोदय) समय: रात 08:17 बजे (दिल्ली पंचांग अनुसार)।

  • कुल व्रत अवधि: लगभग 13 घंटे 46 मिनट।

व्रत रखने वाली महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे 29 अक्टूबर की सुबह सूर्योदय से पहले यानी ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 04:48 बजे से 05:39 बजे के मध्य अपनी सास द्वारा दी गई सरगी (फल, मेवे, मीठी सेवइयां आदि) ग्रहण कर लें, क्योंकि सूर्योदय के बाद जल का एक घूंट लेना भी शास्त्र सम्मत नहीं माना जाता।

करवा चौथ 2026 शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त (Puja Muhurat)

करवा चौथ पर शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान श्री गणेश, कार्तिकेय और करवा माता की विधिवत पूजा की जाती है। 29 अक्टूबर को पूजा का सबसे पावन और अभीष्ट समय इस प्रकार है:

  • करवा चौथ पूजा मुहूर्त: शाम 05:38 बजे से शाम 06:56 बजे तक।

  • पूजा की कुल अवधि: 1 घंटा 18 मिनट।

  • अमृत/शुभ चौघड़िया: शाम 05:38 बजे से लेकर शाम 07:15 बजे तक का समय पूजा, करवा चौथ की पावन कथा श्रवण और थाली फेरने की रस्म के लिए सर्वोत्तम रहेगा।

इस मुहूर्त में महिलाएं सोलह श्रृंगार कर एक साथ एकत्रित होकर मिट्टी के करवे की पूजा करती हैं, माता गौरी को सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, चुनरी) अर्पित करती हैं और करवा चौथ व्रत कथा का पाठ करती हैं।

चंद्रोदय और अर्घ्य देने का समय: शहरवार टाइमिंग

रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है। गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को देश के विभिन्न शहरों में चंद्रमा के निकलने (Moonrise) का संभावित समय इस प्रकार है:

  • नई दिल्ली / एनसीआर: रात लगभग 08:17 बजे

  • लखनऊ / उत्तर प्रदेश: रात लगभग 08:05 से 08:08 बजे

  • नोएडा / गाजियाबाद: रात लगभग 08:16 बजे

  • जयपुर / राजस्थान: रात लगभग 08:24 बजे

  • मुंबई / महाराष्ट्र: रात लगभग 08:48 बजे

  • कोलकाता / पश्चिम बंगाल: रात लगभग 07:40 बजे

  • पटना / बिहार: रात लगभग 07:49 बजे

  • बेंगलुरु / कर्नाटक: रात लगभग 08:40 बजे

(नोट: स्थानीय मौसम, बादल या भौगोलिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग शहरों में चांद दिखने के समय में 5 से 10 मिनट का अंतर हो सकता है।)

चंद्रमा की पूजा, अर्घ्य और पारण की सही विधि

रात में चंद्रमा के आकाश में उदित होने के बाद सुहागिन महिलाओं को इन पारंपारिक चरणों का पालन करते हुए व्रत पूर्ण करना चाहिए:

  1. पूजा की थाली तैयार करें: थाली में जल से भरा तांबे या पीतल का लोटा, घी का दीपक, कुमकुम, अक्षत, धूपबत्ती, सफेद मिठाई और छलनी रखें।

  2. चंद्रमा को अर्घ्य: जल के लोटे में थोड़ा कच्चा दूध, अक्षत और रोली मिलाकर चंद्रमा को 'ॐ सों सोमाय नमः' मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें।

  3. छलनी से दर्शन की रस्म: प्रज्वलित दीपक को छलनी पर रखकर पहले छलनी की ओट से चंद्रमा के दर्शन करें, इसके बाद उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखें और उनके उत्तम स्वास्थ्य व लंबी उम्र की प्रार्थना करें।

  4. पति के हाथों पारण: दर्शन के बाद पति के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। इसके बाद पति अपने हाथों से पत्नी को जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर इस 13 घंटे 46 मिनट के निर्जला व्रत का पारण करवाते हैं।

  5. घर के बड़ों का आशीर्वाद और बायना: पारण के उपरांत पूजा में चढ़ाया गया करवा, फल, मिठाई और सुहाग सामग्री (बायना/बाया) अपनी सास या घर की जेठानी को सादर भेंट कर उनके पैर छूकर सदा सुहागिन रहने का आशीर्वाद प्राप्त करें।

करवा चौथ का यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में प्रगाढ़ता, आपसी सामंजस्य और प्रेम को नई ऊर्जा प्रदान करता है। शुभ मुहूर्त और नियमों का पालन करते हुए की गई यह साधना जीवन में सौभाग्य और खुशहाली का संचार करती है।