Jitiya Vrat 2026: बच्चे को बार-बार लगती है नजर, जितिया व्रत पर जरूर करें सरसों के तेल का यह अचूक उपाय, दूर होगी सारी बलाएं
सनातन धर्म में माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए कई तरह के कठिन व्रत रखती हैं, जिनमें जितिया व्रत (Jitiya Vrat 2026) का विशेष और सर्वोच्च स्थान है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत संतान की सुरक्षा और खुशहाली को समर्पित होता है। इस दौरान महिलाएं भगवान जीमूतवाहन की विधि-विधान से पूजा करती हैं। जितिया व्रत के पावन पर्व पर संतान की लंबी आयु की कामना के साथ-साथ पारंपरिक लोक परंपराओं का भी खास महत्व होता है।
अक्सर आपने देखा होगा कि छोटे बच्चों को बहुत जल्दी नजर लग जाती है, जिसके कारण वे अचानक बीमार रहने लगते हैं या रोने लगते हैं। जितिया व्रत के दिन बच्चों को बुरी नजर से बचाने और उनकी रक्षा के लिए सरसों के तेल से जुड़ी एक विशेष रस्म निभाई जाती है। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, "जितिया व्रत का मुख्य उद्देश्य ही संतान की सुरक्षा और दीर्घायु है, इसलिए इस दिन बच्चों की नजर उतारने और सरसों के तेल का टीका लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।"
क्यों और कैसे की जाती है सरसों के तेल से नजर उतारने की रस्म
धार्मिक और लोक मान्यताओं के अनुसार, सरसों के तेल को नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को दूर करने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। जितिया के दिन सरसों के तेल के साथ-साथ काली राई, थोड़ा सा नमक और सूखी लाल मिर्च का इस्तेमाल करके बच्चों की नजर उतारी जाती है। मां अपनी संतान के सभी कष्टों को दूर करने और उसे बुरी बलाओं से बचाने के लिए पूरी श्रद्धा के साथ यह उपाय करती है।
नजर उतारने की इस प्रक्रिया के लिए आपको कुछ बेहद सामान्य सामग्री की आवश्यकता होती है, जो आसानी से घर में मिल जाती है:
-
शुद्ध सरसों का तेल (थोड़ा सा)
-
एक छोटी कटोरी या दीपक
-
थोड़ी सी काली राई के दाने
-
एक चुटकी नमक
-
2 से 3 सूखी लाल मिर्च
-
रूई की एक बाती
बच्चे को किस दिशा में बैठाएं और क्या है सही विधि
शास्त्रीय नियमों और मान्यताओं के अनुसार, नजर उतारने की इस रस्म को करते समय बच्चे को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आराम से बैठाना चाहिए। इसके बाद घर की मां या परिवार की किसी बड़ी महिला सदस्य द्वारा यह विधि पूरी की जाती है।
पारंपरिक विधि के अनुसार, सबसे पहले एक कटोरी में थोड़ा सा सरसों का तेल लें और उसमें काली राई, नमक तथा सूखी लाल मिर्च का स्पर्श कराएं। इसके बाद रूई की बाती या अपनी दाहिनी हथेली की मदद से इस पूरी सामग्री को बच्चे के सिर से लेकर पैर तक सात बार उल्टी दिशा (एंटी-क्लॉकवाइज) में घुमाया जाता है। नजर उतारते समय मन ही मन भगवान जीमूतवाहन का ध्यान करना चाहिए और बच्चे की लंबी आयु व अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करनी चाहिए। मन में पूरी तरह सकारात्मक भाव रखना बेहद जरूरी माना गया है।
नजर उतारने के बाद सामग्री का क्या करें
नजर उतारने की यह विधि पूरी होने के बाद इस्तेमाल की गई सामग्री (जैसे राई, मिर्च और तेल) को बहुत ही सुरक्षित तरीके से घर से बाहर नष्ट कर देना चाहिए। कई पारंपरिक घरों में इस सामग्री को उपले या कपूर की तेज अग्नि में जला दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब अग्नि में राई और मिर्च के चटकने की आवाज आती है, तो इसका मतलब होता है कि बच्चे की बुरी नजर उतर गई है।
बच्चे को क्यों लगाया जाता है सरसों के तेल का टीका
नजर उतारने की इस रस्म को संपन्न करने के बाद बच्चे के पैर के तलवों, कान के पीछे या माथे पर शुद्ध सरसों के तेल का एक छोटा सा टीका लगाने का भी पुराना रिवाज है। माना जाता है कि यह उपाय बच्चे के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना देता है, जिससे उसे किसी भी बुरी नजर या नकारात्मक प्रभाव से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके।