Mangal Gochar 2026: मंगल का नीच राशि में गोचर मचाएगा उथल-पुथल, इन 4 राशियों पर टूट सकता है संकट और शत्रु हो सकते हैं हावी

Mangal Gochar 2026: मंगल का नीच राशि में गोचर मचाएगा उथल-पुथल, इन 4 राशियों पर टूट सकता है संकट और शत्रु हो सकते हैं हावी

वैदिक ज्योतिष में साहस, पराक्रम, भूमि, ऊर्जा और रक्त के कारक ग्रह मंगल देव का गोचर बेहद प्रभावशाली माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, मंगल जब भी अपनी उच्च राशि मकर से निकलकर अपनी नीच राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश करते हैं, तो उनकी ऊर्जा में भारी असंतुलन देखने को मिलता है। कर्क एक जल तत्व और चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि है, जबकि मंगल अग्नि तत्व के स्वामी हैं। अग्नि और जल के इस परस्पर विरोधी मिलन से मंगल का प्रभाव कमजोर यानी 'नीच' हो जाता है।

मंगल का नीच राशि में यह गोचर देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन में उथल-पुथल लाने की क्षमता रखता है। विशेष रूप से 4 राशि वालों के लिए यह गोचर काल काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। इन राशियों के जातकों को कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रुओं की साजिशों, स्वास्थ्य संबंधी गिरावट और आर्थिक लेन-देन में भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

इन 4 राशि वालों को रहना होगा बेहद सतर्क: बढ़ सकती हैं मुश्किलें

मंगल के नीच अवस्था में संचरण करने के दौरान निम्नलिखित 4 राशियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है:

  • 1. मेष राशि (Aries):

    मेष राशि के स्वामी स्वयं मंगल देव हैं। अपनी ही राशि के स्वामी का नीच राशि में जाना जासक के चौथे भाव (सुख भाव) को प्रभावित करेगा। इसके प्रभाव से माता के स्वास्थ्य में गिरावट, पारिवारिक संपत्तियों को लेकर विवाद और घर की सुख-शांति में खलल पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में विरोधी आपकी छवि बिगाड़ने की फिराक में रहेंगे। इस दौरान भूमि या नया वाहन खरीदने के फैसले को टालना ही बेहतर होगा।

  • 2. मिथुन राशि (Gemini):

    मिथुन राशि के लिए मंगल का गोचर वाणी और धन के दूसरे भाव में होगा। नीच का मंगल आपकी वाणी में कटुता और अकारण गुस्सा भर सकता है, जिससे बने-बनाए काम बिगड़ सकते हैं। लेन-देन में धोखा मिलने या भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। गुप्त शत्रु इस समय आपके खिलाफ साजिश रच सकते हैं, इसलिए अपने व्यावसायिक फैसलों और गोपनीय बातों को किसी भी सहकर्मी से साझा न करें।

  • 3. धनु राशि (Sagittarius):

    धनु राशि के जातकों के लिए मंगल अष्टम भाव (आयु, संकट व दुर्घटना भाव) में गोचर करेंगे। अष्टम भाव में नीच का मंगल रक्त विकार, चोट-चपेट और अचानक आने वाली कानूनी अड़चनों का संकेत देता है। वाहन चलाते समय बेहद सतर्क रहें। कार्यस्थल पर सहकर्मियों का असहयोग और उच्चाधिकारियों से मतभेद मानसिक तनाव को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

  • 4. मकर राशि (Capricorn):

    मकर राशि के जातकों के लिए मंगल सप्तम भाव (वैवाहिक जीवन और साझेदारी) में प्रवेश करेंगे। यहां से मंगल की दृष्टि लग्न भाव पर भी रहेगी। पार्टनरशिप में चल रहे व्यापार में धोखा या साझेदारी टूटने की नौबत आ सकती है। दांपत्य जीवन में बिना किसी ठोस वजह के गंभीर विवाद खड़े हो सकते हैं। विरोधी पक्ष सीधे तौर पर आप पर हावी होने की कोशिश करेगा, इसलिए शांत रहकर कूटनीति से काम लें।

मंगल के नकारात्मक प्रभाव से बचने के सरल और अचूक उपाय

यदि आपकी कुंडली में मंगल की दशा-अंतर्दशा चल रही है या आप उक्त 4 राशियों में से हैं, तो अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए ये उपाय अवश्य करें:

  • हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ: प्रतिदिन अथवा प्रत्येक मंगलवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। संभव हो तो मंगलवार के दिन सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें।

  • मंगल के बीज मंत्र का जाप: प्रतिदिन 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' मंत्र का 108 बार तुलसी या रुद्राक्ष की माला से जाप करें।

  • गुड़ और मसूर की दाल का दान: मंगलवार के दिन किसी जरूरतमंद को तांबे का बर्तन, लाल मसूर की दाल, लाल चंदन या गुड़ का दान करें।

  • क्रोध पर नियंत्रण और नमक का संयम: मंगल के नीच प्रभाव के दौरान अपने क्रोध और जल्दबाजी पर संयम रखें। मंगलवार के दिन भोजन में नमक का त्याग या कम सेवन करना लाभकारी माना जाता है।