‘टॉक्सिक’ के बाद ‘मिर्जापुर’ को भी निगल गई Hanuman Ansh: 35वें दिन 10 करोड़ कमाकर रचा इतिहास; देखते रह गए मेगा बजट मेकर्स

‘टॉक्सिक’ के बाद ‘मिर्जापुर’ को भी निगल गई Hanuman Ansh: 35वें दिन 10 करोड़ कमाकर रचा इतिहास; देखते रह गए मेगा बजट मेकर्स

भारतीय बॉक्स ऑफिस के इतिहास में कभी-कभार ऐसा चमत्कार देखने को मिलता है, जो बड़े-बड़े फिल्म पंडितों, ट्रेड एनालिस्ट्स और मेगा-बजट प्रोड्यूसर्स के गणित को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है। डॉ. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी और नीम करोली बाबा के दिव्य जीवन पर आधारित आध्यात्मिक फिल्म 'हनुमान अंश' (Hanuman Ansh) ने सिनेमाघरों में वो आंधी पैदा कर दी है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।

महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी यह फिल्म अब बड़े पर्दे पर बड़े-बड़े सुपरस्टार्स की नींद उड़ा रही है। जहां 300 से 400 करोड़ रुपये के बजट में बनी सुपरस्टार यश की पैन-इंडिया फिल्म 'टॉक्सिक' (Toxic) दूसरे हफ्ते में ही हांफने लगी और सिंगल डिजिट में सिमट गई, वहीं पंकज त्रिपाठी स्टारर मोस्ट अवेटेड 'मिर्जापुर: द मूवी' (Mirzapur The Film) के रिलीज होने के बावजूद दर्शक सिर्फ और सिर्फ 'हनुमान अंश' देखने सिनेमाघरों में उमड़ रहे हैं।

35वें दिन भी डबल डिजिट में कमाई: तोड़े 5वें हफ्ते के सारे ऑल-टाइम रिकॉर्ड

फिल्म व्यापार विशेषज्ञ उस वक्त दंग रह गए जब रिलीज के पांचवें हफ्ते में, यानी 35वें दिन (5वें गुरुवार) के बॉक्स ऑफिस आंकड़े सामने आए। जहां सामान्य बॉलीवुड और साउथ की बड़ी से बड़ी फिल्में चौथे या पांचवें हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते चंद लाख रुपये के कलेक्शन पर सिमट जाती हैं, वहीं 'हनुमान अंश' ने अपने 35वें दिन भी भारत में नेट ₹10.00 करोड़ की धमाकेदार कमाई दर्ज की है।

ट्रेड ट्रैकर सैकनिल्क (Sacnilk) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 35वें दिन यह कलेक्शन 7,664 से अधिक शोज के जरिए हुआ है। फिल्म का कुल भारतीय नेट कलेक्शन अब ₹163.13 करोड़ के पार पहुंच चुका है, जबकि इसका ग्रॉस कलेक्शन ₹192.75 करोड़ हो गया है। फिल्म अब घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ₹200 करोड़ ग्रॉस के जादुई आंकड़े से महज चंद कदम दूर है।

10 लाख की ओपनिंग से 190 करोड़ तक का सफर: माउथ पब्लिसिटी का अद्भुत करिश्मा

इस फिल्म की सफलता की कहानी किसी परिकथा जैसी है। 7 अगस्त को जब यह फिल्म थिएटर्स में रिलीज हुई थी, तब न तो इसका कोई करोड़ों का पीआर कैंपेन था और न ही कोई चमचमाते इवेंट्स:

  • पहले दिन का हाल: फिल्म ने अपने ओपनिंग डे पर मात्र ₹10 लाख का कलेक्शन किया था और इसे देशभर में केवल 355 शोज मिले थे।

  • दूसरे हफ्ते तक सन्नाटा: दूसरे हफ्ते में यह फिल्म रोजाना महज 4 से 5 लाख रुपये कमा रही थी और कई जगहों से इसके शोज हटाए जा रहे थे।

  • 17वें दिन हुआ चमत्कार: तीसरे हफ्ते के दौरान सोशल मीडिया, रील्स और दर्शकों की जुबानी तारीफ (Word of Mouth) का ऐसा चक्रवात उठा कि सिनेमाघरों के बाहर लंबी कतारें लग गईं।

  • पांचवें हफ्ते का धमाका: फिल्म ने अपने पांचवें शनिवार को ₹16.50 करोड़ और पांचवें रविवार को रिकॉर्डतोड़ ₹22.75 करोड़ का बिजनेस किया। 35वें दिन भी 10 करोड़ कमाने के मामले में इसने 'पठान', 'स्त्री 2', '3 इडियट्स' और 'पुष्पा 2' जैसी कल्ट हिट्स को 35वें दिन के कलेक्शन में काफी पीछे छोड़ दिया है।

'टॉक्सिक' और 'मिर्जापुर द मूवी' को कैसे पड़ा भारी झटका?

बॉक्स ऑफिस पर इस समय सबसे ज्यादा नुकसान उन बड़ी फिल्मों को झेलना पड़ा है, जिन्हें इस महीने सिनेमाघरों पर एकछत्र राज करने की उम्मीद थी:

  • यश की 'टॉक्सिक' हुई धड़ाम: भारी प्रमोशन और 24,000 से अधिक शोज के साथ ओपनिंग लेने वाली यश की फिल्म 'टॉक्सिक' कमजोर स्क्रिप्ट और नेगेटिव रिव्यूज के चलते 13वें-14वें दिन ही महज 39 से 60 लाख रुपये प्रतिदिन पर आ गिरी। थिएटर मालिकों ने टॉक्सिक के शोज काटकर 'हनुमान अंश' को स्क्रीन सौंप दिए।

  • 'मिर्जापुर: द मूवी' की रफ्तार थमी: कालीन भैया और गुड्डू पंडित के भौकाल वाली फिल्म 'मिर्जापुर' ने अपने पहले हफ्ते में ₹10.55 करोड़ के आसपास का कारोबार किया, लेकिन 'हनुमान अंश' की मजबूत पकड़ ने इसके स्क्रीन शेयर और मल्टीप्लेक्स ऑक्यूपेंसी को बुरी तरह प्रभावित किया है।

नीम करोली बाबा की भक्ति और सादगी ने जीता दर्शकों का दिल

फिल्म में अभिनेता शोभिनव सत्या (शोभित श्रीवास्तव) ने नीम करोली बाबा (महाराज जी) का मुख्य किरदार निभाया है, जबकि चंदन आनंद और विहान शhedge ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म की कहानी 12-13 वर्ष के बालक लक्ष्मीनारायण द्वारा मां के निधन के बाद ईश्वर की खोज में घर छोड़ने और आगे चलकर दीन-दुखियों की सेवा करते हुए महान संत बनने के सफर को दर्शाती है।

सिनेमाघरों से सामने आ रहे वीडियोज में देखा जा सकता है कि दर्शक फिल्म खत्म होने के बाद खड़े होकर जयकारे लगा रहे हैं और कई लोग भावुक होकर स्क्रीन के सामने हाथ जोड़ते नजर आ रहे हैं। कैंची धाम के प्रति लोगों की अटूट आस्था और फिल्म की रूहानी सादगी ने इसे केवल एक सिनेमा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक आंदोलन बना दिया है।