Relationship and Sleep : अच्छी नींद और प्यार के बीच क्या है ज्यादा जरूरी? जानें कब अकेले सोना बन जाता है मजबूरी
News India Live, Digital Desk : जब हम किसी रिश्ते में होते हैं, तो पार्टनर के साथ बेड शेयर करना प्यार जताने और एक-दूसरे के करीब महसूस करने का एक बहुत ही खूबसूरत तरीका माना जाता है. एक-दूसरे से लिपटकर सोना, बातें करना और साथ में सुबह की चाय पीना... यह सब सोचने में बहुत अच्छा लगता है. लेकिन क्या यह हमेशा इतना ही आरामदायक होता है?
जरा सोचिए, आपके पार्टनर को जोर-जोर से खर्राटे लेने की आदत है, या वो पूरी रात चादर अपनी तरफ खींच लेते हैं. हो सकता है आपको ठंडे कमरे में सोना पसंद हो और उन्हें गर्मी लगती हो. ऐसी छोटी-छोटी बातें अक्सर हमारी नींद खराब कर देती हैं और अगले दिन हम थका हुआ और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं.
तब मन में यह सवाल आता है कि क्या पार्टनर के साथ सोना हमेशा फायदेमंद होता है, या कभी-कभी अकेले सोना ज्यादा बेहतर है? चलिए, इसके दोनों पहलुओं को समझते हैं.
पार्टनर के साथ सोने के फायदे
साथ सोने का सबसे बड़ा फायदा भावनात्मक जुड़ाव है. जब आप अपने पार्टनर के साथ सोते हैं, तो आप खुद को सुरक्षित और महफूज़ महसूस करते हैं. इससे शरीर में 'ऑक्सीटोसिन' नाम का हार्मोन रिलीज़ होता है, जिसे 'लव हार्मोन' भी कहते हैं. यह हार्मोन तनाव को कम करता है, चिंता घटाता है और आपको शांत महसूस कराता है. पार्टनर का साथ आपको भावनात्मक रूप से मज़बूत बनाता है और रिश्ते में प्यार को भी गहरा करता है.
कब बन जाती है साथ सोना एक मुसीबत?
प्यार अपनी जगह है, लेकिन नींद किसी के लिए भी समझौता करने वाली चीज नहीं है. कई बार पार्टनर की कुछ आदतें हमारी नींद की सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती हैं:
- खर्राटे: यह सबसे आम समस्या है. पार्टनर के खर्राटों की वजह से दूसरे की नींद पूरी ही नहीं हो पाती.
- अलग-अलग सोने का समय: हो सकता है आप जल्दी सोना चाहते हों, लेकिन आपके पार्टनर देर रात तक फोन चलाते हैं या लाइट जलाकर पढ़ते हैं.
- करवटें बदलना: कुछ लोगों को नींद में बहुत ज्यादा हिलने-डुलने की आदत होती है, जिससे पास में सो रहे व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती है.
- चादर या कंबल खींचना: अक्सर रात में यह 'जंग' चलती रहती है, जिसमें एक पार्टनर पूरी चादर अपनी तरफ खींच लेता है.
जब नींद पूरी नहीं होती, तो इसका असर हमारी सेहत और हमारे रिश्ते, दोनों पर पड़ता है.
तो क्या अकेले सोना ही समाधान है?
अकेले सोने का सबसे बड़ा फायदा है 'सुकून की नींद'. आपको कोई डिस्टर्ब करने वाला नहीं होता. आप जैसे चाहें, वैसे सो सकते हैं. पूरे बेड पर आपका राज होता है. आप अपने हिसाब से कमरे का तापमान सेट कर सकते हैं और जब चाहें, तब सो सकते हैं. जब आपकी नींद अच्छी और गहरी होती है, तो आप सुबह तरोताज़ा उठते हैं और आपका पूरा दिन अच्छा गुजरता है.
लेकिन इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि कुछ लोगों को अकेले सोने पर अकेलापन या असुरक्षित महसूस हो सकता है. उन्हें रात में अपने पार्टनर की कमी खल सकती है.
आखिरी फैसला आपका है
असल में, इसका कोई एक सही जवाब नहीं है कि साथ सोना बेहतर है या अकेले. यह पूरी तरह से आप और आपके पार्टनर पर निर्भर करता है. अगर आप एक-दूसरे की आदतों के साथ आराम से सो पाते हैं, तो साथ सोने से बेहतर कुछ नहीं. लेकिन अगर आपकी नींद रोज खराब हो रही है और इसका असर आपके स्वास्थ्य और रिश्ते पर पड़ रहा है, तो अलग-अलग सोने में कोई बुराई नहीं है. इसे 'स्लीप डिवोर्स' भी कहा जाता है और आजकल कई कपल्स इसे अपना रहे हैं ताकि वे बेहतर नींद ले सकें और दिन में एक-दूसरे के साथ अच्छे से रह सकें.
सबसे जरूरी चीज 'अच्छी नींद' है, चाहे वो साथ आकर मिले या अलग सोकर.