छत्तीसगढ़ में हमर लैब का कायाकल्प अब अटल आरोग्य लैब से होगी हाईटेक जांच, साय सरकार ने बदला नाम और स्वरूप
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय लिया है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में संचालित 'हमर लैब' का नाम अब बदलकर 'अटल आरोग्य लैब' कर दिया गया है। केवल नाम ही नहीं, बल्कि इन लैब्स के पूरे ढांचे और तकनीकी स्वरूप में भी क्रांतिकारी बदलाव किए जा रहे हैं। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन नई लैब्स को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 'हाईटेक' बनाया जाएगा, ताकि मरीजों को निजी सेंटरों के चक्कर न काटने पड़ें।
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर नई पहचान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन के विजन को आगे बढ़ाते हुए इन लैब्स का नामकरण किया है। सरकार का मानना है कि 'अटल आरोग्य लैब' न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का प्रतीक होगी, बल्कि यह प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और मुफ्त जांच सुविधाएं पहुंचाने के संकल्प को भी दोहराएगी।
अत्याधुनिक मशीनों से लैस होंगी 135 लैब
प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों, सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में संचालित लगभग 135 लैब्स को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जा रहा है।
नई तकनीक: इन लैब्स में अब अत्याधुनिक 'फुली ऑटोमेटेड' बायोकेमिस्ट्री और हेमेटोलॉजी एनालाइजर्स लगाए जाएंगे।
जांच का दायरा: वर्तमान में उपलब्ध जांचों की संख्या में 30% तक की बढ़ोतरी की जाएगी, जिसमें थायराइड, विटामिन-B12 और कैंसर मार्कर्स जैसी जटिल जांचें भी शामिल होंगी।
डिजिटल रिपोर्टिंग: मरीजों को उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप या एसएमएस के जरिए डिजिटल रिपोर्ट भेजने की सुविधा भी शुरू की जा रही है।
निजी लैब जैसी शुद्धता, सरकारी में मुफ्त सुविधा
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के अनुसार, अटल आरोग्य लैब्स में 'क्वालिटी कंट्रोल' पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन लैब्स को NABL (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) से प्रमाणित कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे सरकारी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता निजी लैब्स के बराबर होगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर निजी जांच केंद्रों के आर्थिक बोझ को कम करना है।
स्टाफ की ट्रेनिंग और 24x7 सेवा का लक्ष्य
कायाकल्प योजना के तहत केवल मशीनों को ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। लैब टेक्नीशियनों के लिए विशेष रिफ्रेशर कोर्स शुरू किए गए हैं। साथ ही, बड़े शहरों के जिला अस्पतालों में इन लैब्स को 24 घंटे (सात दिन) संचालित करने की योजना है, ताकि इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को रात के समय रिपोर्ट के लिए सुबह का इंतजार न करना पड़े।