Record Breaking Monsoon Rain: जुलाई में राजस्थान में 69 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, 67% अधिक Rainfall
- by Archana
- 2025-08-01 17:17:00
News India Live, Digital Desk: राजस्थान में जुलाई महीने में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने पिछले 69 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मानसून के दूसरे चरण के सक्रिय होने से राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई से 31 जुलाई, 2025 के बीच राज्य में औसत से 67% अधिक बारिश दर्ज की गई है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई से 31 जुलाई, 2025 तक राजस्थान में औसत 250.6 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य (250.3 मिमी) से 67% अधिक है। इससे पहले, जुलाई 1956 में 261.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी, जो अब तक का सबसे अधिक रिकॉर्ड था। इस वर्ष की बारिश ने पिछले 69 वर्षों के रिकॉर्ड को पार कर दिया है, जिससे कई इलाकों में जलभराव और जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है।
कहां हुई सर्वाधिक बारिश?
राज्य में इस बार पूर्वी राजस्थान में पश्चिमी राजस्थान की तुलना में कहीं अधिक बारिश हुई है। हाड़ौती अंचल (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) के जिलों में सामान्य से 100% से भी अधिक बारिश दर्ज की गई है। करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, भरतपुर, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक, बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, राजसमंद, सिरोही, पाली, सिरोही, बाड़मेर, जोधपुर, जालौर, नागौर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनू, सीकर, दौसा, सवाई माधोपुर, जयपुर, कोटा, बूंदी, बांरा, करौली, धौलपुर, भरतपुर, अलवर, दोसा, टोक, झुंझुनू, सीकर, चूरू, नागौर, अजमेर, भीलवाड़ा, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जैसलमेर।
प्रमुख शहर जहाँ भारी बारिश दर्ज की गई:
अलवर: 187% अधिक बारिश
भरतपुर: 158% अधिक बारिश
धौलपुर: 123% अधिक बारिश
करौली: 120% अधिक बारिश
कोटा: 111% अधिक बारिश
डूंगरपुर: 97% अधिक बारिश
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक राज्य में मानसून सक्रिय रहेगा और कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। हालांकि, कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना कम है, लेकिन सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
किसानों को मिली राहत, पर जनजीवन अस्त-व्यस्त
इस भारी बारिश से किसानों को राहत मिली है, खासकर उन इलाकों में जहां मानसून की देरी से चिंता बनी हुई थी। हालांकि, कई जगहों पर जलभराव के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।
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