झारखंड के 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता रद्द, कहीं आपका कॉलेज भी तो इस डेंजर जोन में नहीं?

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News India Live, Digital Desk: आजकल हर मध्यमवर्गीय परिवार का सपना होता है कि उनका बच्चा मेडिकल फील्ड में जाए, और D.Pharma (डिप्लोमा इन फार्मेसी) इसके लिए एक आसान और पॉपुलर रास्ता माना जाता है। लेकिन झारखंड से एक ऐसी खबर आई है जिसने उन हजारों छात्रों और पेरेंट्स की नींद उड़ा दी है जो इन कॉलेजों में पढ़ रहे हैं या इस साल एडमिशन लेने की सोच रहे थे।

फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने अपनी ताजा जांच के बाद झारखंड के 34 फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता या संबद्धता रद्द करने का कड़ा फैसला लिया है। यह फैसला कोई रातों-रात नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे कॉलेज संचालकों की लापरवाही एक बड़ी वजह रही है।

आखिर मान्यता रद्द क्यों हुई?
PCI एक केंद्रीय संस्था है जो देशभर के फार्मेसी कॉलेजों के मानक तय करती है। नियम ये कहते हैं कि कॉलेज के पास पर्याप्त लैब होनी चाहिए, छात्रों को पढ़ाने के लिए अनुभवी प्रोफेसर होने चाहिए और बिल्डिंग ऐसी हो जहाँ सुरक्षित माहौल में पढ़ाई हो सके। लेकिन झारखंड के इन 34 कॉलेजों में मानकों की सरेआम अनदेखी की जा रही थी। कई कॉलेजों में फैकल्टी (टीचर्स) कागज़ पर तो थे पर कॉलेज में नहीं, वहीं लैब में ज़रूरी दवाएं और उपकरण तक नहीं पाए गए। जब कई चेतावनियों के बाद भी इन कॉलेजों ने अपना स्तर नहीं सुधारा, तो PCI ने यह बड़ा कदम उठाया।

अब उन छात्रों का क्या होगा?
यही सबसे बड़ा और डरावना सवाल है। जिन स्टूडेंट्स ने पहले से वहां एडमिशन ले लिया है, उनके लिए ये स्थिति बहुत मुश्किल भरी हो गई है। बिना PCI की मान्यता के कोई भी छात्र अपनी डिग्री या डिप्लोमा पूरा करने के बाद फार्मासिस्ट के तौर पर सरकारी या निजी क्षेत्र में काम करने के लिए अपना 'पंजीकरण' (Registration) नहीं करा पाएगा। मतलब, बिना मान्यता की पढ़ाई सिर्फ कागज़ का टुकड़ा बनकर रह जाएगी।

छात्रों और पेरेंट्स को क्या करना चाहिए?
अगर आप इस साल यानी 2026 के सेशन में झारखंड के किसी भी निजी फार्मेसी कॉलेज में दाखिला लेने का मन बना रहे हैं, तो रुकिए! एडमिशन लेने से पहले कॉलेज से उनका मान्यता प्रमाण पत्र (Approval Certificate) जरूर मांगें। इसके अलावा, सीधे PCI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देखें कि क्या उस कॉलेज का नाम वर्तमान सूची में 'अप्रूव्ड' है या नहीं।