RBI Policy Update : महंगाई, जीएसटी राहत और वैश्विक दर कटौती से बढ़ी अटकलें, क्या होगा आगे?
News India Live, Digital Desk: RBI Policy Update : भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) अपनी आगामी नीति घोषणा को लेकर आजकल काफी सुर्खियों में है. जिस तरह से वैश्विक स्तर पर वित्तीय हालात बदल रहे हैं, महंगाई (Inflation) को नियंत्रित करने के प्रयास चल रहे हैं, और साथ ही जीएसटी परिषद (GST Council) से भी कुछ राहत मिलने की उम्मीदें हैं, इन सब बातों से भारतीय आर्थिक नीतियों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आरबीआई की अगली नीतिगत बैठक (RBI Policy Meet) में क्या बड़े फैसले लिए जाएंगे.
दरअसल, इस समय अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर चुनौतियों और उम्मीदों दोनों का सामना कर रही है:
- महंगाई पर लगाम (Inflation Control): महंगाई आज भी एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर आरबीआई लगातार नज़र रख रहा है. खासकर, खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें और ऊर्जा की वैश्विक दरों में उतार-चढ़ाव भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल रहा है. आरबीआई का मुख्य लक्ष्य हमेशा से महंगाई को एक तय दायरे में रखना रहा है, इसलिए अगले फैसले इसी पर केंद्रित हो सकते हैं.
- वैश्विक दर कटौती का दबाव (Global Rate Cuts): दुनिया भर के कई केंद्रीय बैंक (central banks) अब अपनी ब्याज दरों में कटौती पर विचार कर रहे हैं. यह इसलिए हो रहा है ताकि आर्थिक गतिविधियों को गति दी जा सके और मंदी की आशंकाओं से निपटा जा सके. अगर प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं (global economies) दरें घटाती हैं, तो आरबीआई पर भी कुछ ऐसी ही राहत देने का दबाव बढ़ सकता है.
- जीएसटी से राहत की उम्मीदें (GST Relief): जीएसटी परिषद की हालिया बैठकों से उद्योगों और उपभोक्ताओं को कुछ कर राहत (tax relief) मिलने की उम्मीद है. अगर ऐसा होता है तो इससे कुछ हद तक महंगाई का दबाव कम हो सकता है और साथ ही उपभोग (consumption) को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक वृद्धि को सहारा मिलेगा.
- मज़बूत अर्थव्यवस्था, फिर भी सतर्कता: भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मज़बूत प्रदर्शन कर रही है, लेकिन बाहरी जोखिमों (external risks) और अनिश्चितताओं के कारण केंद्रीय बैंक कोई भी फैसला लेने में सतर्कता बरत रहा है. नीतिगत दरें (policy rates) बढ़ाना महंगाई को रोकने का एक तरीका है, लेकिन इससे विकास दर (growth rate) पर भी असर पड़ सकता है.
कुल मिलाकर, आरबीआई के सामने महंगाई को काबू में रखने, आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से सामंजस्य बिठाने की चुनौती है. यह देखना दिलचस्प होगा कि अगली नीतिगत बैठक में क्या बड़े कदम उठाए जाते हैं और क्या आम आदमी के लिए कुछ राहत भरी खबरें आती हैं. सभी की निगाहें आरबीआई के इस अहम फैसले पर टिकी हुई हैं.