RBI Check Bounce New Rules 2026: अब चेक बाउंस पड़ा भारी! लगेगा ₹10,000 तक जुर्माना, जेल जाने की भी आ सकती है नौबत

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नई दिल्ली। अगर आप भी लेन-देन के लिए चेक (Cheque) का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने Check Bounce New Rules 2026 के तहत नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। अब चेक बाउंस होना न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि इसके लिए आपको अपनी जेब से ₹10,000 तक का भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। आरबीआई का यह कड़ा कदम बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता लाने और व्यापारियों के फंसे हुए पैसों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उठाया गया है।

नए नियमों का मुख्य उद्देश्य: 'चेक मतलब पक्का भुगतान'

आरबीआई के नए निर्देशों के अनुसार, चेक को अब मजाक में लेना महंगा साबित होगा। इन नियमों का मकसद चेक बाउंस होने की वजह से अदालतों में लंबित लाखों केसों के बोझ को कम करना और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।

त्वरित कार्रवाई: अब मामला केवल कोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बैंक भी अपने स्तर पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करेगा।

भरोसेमंद बैंकिंग: इन नियमों से छोटे व्यापारियों और दुकानदारों का चेक पर भरोसा बढ़ेगा, जिससे व्यापार सुगम होगा।

₹10,000 का जुर्माना और सख्त पेनाल्टी का गणित

RBI Check Bounce Penalty 2026 के तहत जुर्माने की राशि बाउंस होने के कारण और गंभीरता के आधार पर तय की जाएगी:

खाते में पैसा न होना (Insufficient Funds): यदि खाते में बैलेंस न होने के बावजूद चेक जारी किया गया है, तो बैंक अधिकतम ₹10,000 तक का जुर्माना वसूल सकता है।

खाता फ्रीज होना: जो ग्राहक बार-बार जानबूझकर चेक बाउंस करेंगे, बैंक उनके खाते को कुछ समय के लिए फ्रीज (Freeze) कर सकता है या उनकी नई चेकबुक जारी करने पर रोक लगा सकता है।

सिस्टम की गलती: यदि चेक बैंक की तकनीकी खराबी या कर्मचारी की गलती से बाउंस होता है, तो ग्राहक पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

[Image showing a bounce cheque with a 'Insufficient Funds' stamp and a warning sign of ₹10,000 penalty]

व्यापारियों और आम जनता पर क्या होगा असर?

इन बदलावों का सीधा असर आम नागरिकों और बिजनेस सेक्टर पर दिखने वाला है:

अनुशासन में बढ़ोतरी: अब चेक साइन करने से पहले लोग दो बार बैलेंस चेक करेंगे।

कानूनी पेचीदगी: चेक बाउंस होने पर बैंक सीधे ग्राहक को नोटिस भेजेगा, जिसके बाद निर्धारित समय में भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई (Negotiable Instruments Act के तहत) शुरू हो जाएगी।

क्रेडिट स्कोर पर असर: चेक बाउंस होने से आपका CIBIL Score भी गिर सकता है, जिससे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा।

चेक बाउंस की पेनाल्टी से बचने के लिए 'प्रो' टिप्स

अगर आप ₹10,000 के जुर्माने और कानूनी पचड़ों से बचना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

बैलेंस चेक करें: चेक बुक निकालने से पहले मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए अपना क्लोजिंग बैलेंस जरूर देखें।

पोस्ट डेटेड चेक (PDC): यदि आपने भविष्य की तारीख का चेक दिया है, तो उस तारीख पर पैसा होना सुनिश्चित करें।

डिजिटल विकल्प: छोटे लेन-देन के लिए UPI, NEFT या RTGS का चुनाव करें, जहाँ ट्रांजैक्शन तुरंत और कन्फर्म होता है।

हस्ताक्षर मिलान: हस्ताक्षर (Sign) हमेशा वही करें जो बैंक रिकॉर्ड में हैं, ताकि 'Sign Mismatch' की वजह से चेक बाउंस न हो।