PNB-Star Health Deal: बैंक के भरोसे ली पॉलिसी और क्लेम के वक्त मिला धोखा? जानें क्लेम रिजेक्ट होने पर कैसे सिखाएं सबक
नई दिल्ली। देश के प्रतिष्ठित सरकारी बैंकों में शुमार पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के बीच हुए हालिया गठबंधन ने ग्राहकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। जब PNB जैसा भरोसेमंद बैंक किसी निजी बीमा कंपनी के साथ हाथ मिलाता है, तो आम आदमी को लगता है कि उसकी गाढ़ी कमाई और सेहत दोनों सुरक्षित हैं। लेकिन, हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। सोशल मीडिया और कंज्यूमर फोरम पर ऐसी शिकायतों की बाढ़ आ गई है जहाँ ग्राहकों का आरोप है कि कैशलेस सुविधा और क्लेम के वक्त उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है।
क्लेम रिजेक्शन से फूटा ग्राहकों का गुस्सा
बीमा क्षेत्र में 'कैशलेस' सुविधा का वादा तो बड़े जोर-शोर से किया जाता है, लेकिन कई मामलों में देखा गया है कि अस्पताल से डिस्चार्ज के समय अचानक क्लेम रिजेक्ट कर दिया जाता है। स्टार हेल्थ और PNB के इस गठजोड़ के बाद ग्राहकों की उम्मीदें सुरक्षा को लेकर काफी बढ़ गई थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर क्लेम रिजेक्शन और जटिल प्रक्रियाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक अक्सर 'कॉर्पोरेट एजेंट' के रूप में पॉलिसी बेचते हैं, लेकिन जब मदद की बारी आती है, तो वे पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर बैंक के भरोसे पर ली गई पॉलिसी ही काम न आए, तो ग्राहक कहाँ जाए?
स्टार हेल्थ या बैंक की मनमानी पर ऐसे लगाएं लगाम
अगर आप या आपके किसी परिचित का हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम स्टार हेल्थ द्वारा गलत तरीके से रिजेक्ट किया गया है, तो चुप बैठने की जरूरत नहीं है। आप इन कानूनी चरणों का पालन कर अपना हक पा सकते हैं:
इंटरनल लोकपाल को शिकायत: सबसे पहले स्टार हेल्थ और PNB के नोडल अधिकारी को लिखित शिकायत भेजें। नियमानुसार, उन्हें 30 दिनों के भीतर आपकी समस्या का समाधान करना अनिवार्य है।
बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman): यदि कंपनी से संतोषजनक जवाब न मिले, तो आप अपने क्षेत्र के 'बीमा लोकपाल' के पास जा सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त है और यहाँ ग्राहकों की सुनवाई प्राथमिकता पर होती है।
IRDAI 'बीमा भरोसा' पोर्टल: बीमा नियामक संस्था IRDAI के ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करें। यह संस्था बीमा कंपनियों की मनमानी और गलत क्लेम रिजेक्शन पर भारी जुर्माना लगाने की ताकत रखती है।
कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना भी है विकल्प
यदि क्लेम की राशि बड़ी है और आपके पास डॉक्टर की डिस्चार्ज समरी, सभी बिल और कंपनी द्वारा दिए गए रिजेक्शन लेटर जैसे पुख्ता दस्तावेज हैं, तो आप 'ई-दाखिल' (E-Daakhil) के माध्यम से उपभोक्ता अदालत में केस दर्ज कर सकते हैं। याद रखें, बैंक की जिम्मेदारी सिर्फ पॉलिसी बेचना नहीं, बल्कि क्लेम दिलाने में मदद करना भी है। सजग ग्राहक ही ऐसी कंपनियों और बैंकों की मनमानी को रोक सकते हैं। अपनी पॉलिसी के नियमों को ध्यान से पढ़ें और किसी भी विवाद की स्थिति में तुरंत लिखित साक्ष्य जुटाना शुरू करें।