Ramadan 2026 : सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है रोजा पेट के साथ आंख, नाक और कान का भी होता है व्रत, जानें नियत और दुआ

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News India Live, Digital Desk :  इस्लाम में रमजान का महीना सबसे पवित्र और बरकत वाला माना जाता है। यह केवल खान-पान से परहेज करने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि, धैर्य और ईश्वर (अल्लाह) के प्रति पूर्ण समर्पण का समय है। रोजे का असली मकसद इंसान को परहेजगार बनाना है। इस साल 2026 में रमजान का महीना 18 या 19 फरवरी (चाँद के दिखने के आधार पर) से शुरू हो चुका है।

रोजे का असली अर्थ: अंगों का संयम

इस्लामिक विद्वानों के अनुसार, रोजा केवल पेट का नहीं होता, बल्कि शरीर के हर अंग को बुराइयों से बचाना ही असल 'रोजा' है:

जुबान का रोजा: झूठ न बोलना, किसी की बुराई (गीबत) न करना और अपशब्दों से बचना।

आंखों का रोजा: किसी भी अश्लील या गलत चीज को देखने से परहेज करना।

कानों का रोजा: बुराई या संगीत के बजाय कुरान और अच्छी बातें सुनना।

हाथ-पैर का रोजा: किसी पर जुल्म न करना और गलत रास्ते पर न चलना।

दिमाग का रोजा: किसी के प्रति मन में गलत विचार या नफरत न लाना।

रोजा रखने की नियत (Sehri ki Dua)

सुबह सादिक (भोर) से पहले सहरी करने के बाद रोजा रखने की नियत की जाती है। बिना नियत के रोजा मुकम्मल नहीं माना जाता।

नियत: "व बि सोमि गदिन नवैतु मिन शहरि रमजान" > (अर्थ: मैंने रमजान के कल के रोजे की नियत की।)

रोजा खोलने की दुआ (Iftar ki Dua)

शाम को सूर्यास्त के समय खजूर या पानी से रोजा इफ्तार करते समय यह दुआ पढ़ी जाती है:

दुआ: "अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु व बिका आमन्तु व अलैका तवक्कलतु व अला रिज़क़िका अफतरतु" (अर्थ: ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे दिए हुए रिज्क से इफ्तार किया।)

रमजान के तीन अशरे (चरण)

रमजान के 30 दिनों को तीन हिस्सों (10-10 दिन) में बांटा गया है, जिन्हें 'अशरा' कहते हैं:

पहला अशरा (रहमत): यह अल्लाह की दया और कृपा का समय है।

दूसरा अशरा (मगफिरत): यह गुनाहों की माफी और तौबा का समय है।

तीसरा अशरा (नजात): यह जहन्नुम (नरक) की आग से आजादी पाने का समय है।

जकात और सदका: दान का महत्व

रमजान में इबादत के साथ-साथ गरीबों की मदद करना अनिवार्य है। अपनी कुल संपत्ति का 2.5% हिस्सा 'जकात' के रूप में जरूरतमंदों को देना हर हैसियत वाले मुसलमान पर फर्ज है। इससे न केवल धन शुद्ध होता है, बल्कि समाज में समानता भी आती है।