पंजाब के रेल यात्रियों और व्यापारियों की मौज राजपुरा बाईपास लाइन को मिली मंजूरी ₹411 करोड़ से बदलेगी उत्तर रेलवे की तस्वीर

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News India Live, Digital Desk : पंजाब में रेल यातायात को रफ्तार देने और जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। रेल मंत्रालय ने 411.96 करोड़ रुपये की लागत वाली राजपुरा बाईपास रेल लाइन (13.46 किमी) को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस परियोजना की घोषणा करते हुए इसे उत्तर रेलवे के सबसे व्यस्त कॉरिडोर के लिए "गेम-चेंजर" बताया है।

क्या है राजपुरा बाईपास प्रोजेक्ट और क्यों थी इसकी जरूरत?

वर्तमान में अंबाला-जालंधर रेल खंड उत्तर रेलवे के सबसे व्यस्त रूटों में से एक है। राजपुरा यार्ड पर ट्रैफिक का इतना अधिक दबाव है कि ट्रेनों को घंटों आउटर पर खड़ा रहना पड़ता है।

165% क्षमता का दबाव: आंकड़ों के अनुसार, यदि यह बाईपास नहीं बना तो 2030-31 तक इस रूट पर रेल यातायात अपनी क्षमता से 165% अधिक हो जाएगा।

समाधान: 13.46 किलोमीटर लंबी यह नई लाइन न्यू शंभू डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) स्टेशन को राजपुरा-बठिंडा लाइन पर स्थित कौली (Kauli) स्टेशन से सीधे जोड़ेगी।

आम जनता और व्यापारियों को होने वाले 5 बड़े फायदे

ट्रेनों की बढ़ेगी रफ्तार: इस बाईपास के बनने से मालगाड़ियों को राजपुरा यार्ड के अंदर नहीं आना पड़ेगा, जिससे पैसेंजर ट्रेनों के लिए रास्ता साफ होगा और उनकी पंक्चुअलिटी (समयबद्धता) सुधरेगी।

नई ट्रेनों का संचालन: यार्ड की भीड़ कम होने से इस रूट पर भविष्य में 9 अतिरिक्त पैसेंजर ट्रेनें चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

लॉजिस्टिक्स में क्रांति: न्यू शंभू स्टेशन का डीएफसी से सीधा जुड़ाव होने से औद्योगिक सामान और कृषि उत्पादों की ढुलाई तेज और सस्ती होगी।

ईंधन और समय की बचत: मालगाड़ियों को अब इंजन रिवर्सल या लंबे इंतजार की जरूरत नहीं होगी, जिससे करोड़ों का ईंधन बचेगा।

रोजगार के अवसर: 411 करोड़ के इस निर्माण कार्य से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को बल मिलेगा।

'अम्ब्रेला वर्क 2025-26' का हिस्सा

यह परियोजना भारतीय रेलवे की "अम्ब्रेला वर्क 2025-26" योजना के तहत स्वीकृत की गई है। इसके साथ ही राजपुरा-मोहाली नई लाइन (18 किमी) पर भी काम तेज करने की तैयारी है, जो मालवा क्षेत्र को सीधे चंडीगढ़ से जोड़ेगी।

अधिकारियों का क्या है कहना?

रेलवे बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की ड्राइंग और कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई है और जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह कदम उत्तर भारत के औद्योगिक और कृषि हब को बंदरगाहों से जोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।