वसुंधरा राजे के सलाहकार की पत्नी फिर बनीं सरपंच, ग्रामीणों ने जताया अटूट विश्वास
राजस्थान की ग्रामीण राजनीति और पंचायत चुनावों में एक बार फिर सियासी और सामाजिक दबदबे का बड़ा नजारा देखने को मिला है। टोंक जिले की एक प्रमुख ग्राम पंचायत में हुए चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी और वरिष्ठ सलाहकार की धर्मपत्नी ने शानदार जीत हासिल करते हुए एक बार फिर सरपंच का ताज अपने नाम कर लिया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही टोंक जिले के इस ग्रामीण अंचल में भारद्वाज परिवार का 17 वर्षों से चला आ रहा राजनीतिक और सामाजिक जादू पूरी तरह बरकरार साबित हुआ है। स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की मजबूती और ग्रामीणों से सीधे जुड़ाव के बल पर भारद्वाज परिवार ने लगातार कई चुनावों में अपनी निर्बाध सत्ता का परचम लहराया है। इस जीत के बाद पूरे गांव और समर्थक वर्ग में जमकर जश्न का माहौल है।
17 वर्षों का अटूट जनादेश: भारद्वाज परिवार की विकास की राजनीति पर ग्रामीणों ने फिर लगाई मुहर
टोंक जिले की इस प्रतिष्ठित ग्राम पंचायत के चुनाव परिणाम घोषित होते ही भारद्वाज परिवार की निर्बाध लोकप्रियता एक बार फिर साबित हो गई। पिछले 17 वर्षों से इस पंचायत में सरपंच पद पर भारद्वाज परिवार या उनके समर्थित उम्मीदवारों का ही कब्जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सलाहकार के रूप में कार्यरत रहने के बावजूद भारद्वाज परिवार ने हमेशा अपने गांव और आसपास के इलाकों के बुनियादी विकास पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। चाहे गांव में सड़कों का निर्माण हो, पीने के पानी की उचित व्यवस्था हो, बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हो या फिर सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हो—भारद्वाज परिवार ने हमेशा आगे बढ़कर काम किया है। यही वजह है कि चुनावी अखाड़े में विरोधी उम्मीदवारों की तमाम कोशिशों के बावजूद ग्रामीण मतदाता एकमुश्त होकर भारद्वाज परिवार के पक्ष में ही मतदान करते आए हैं।
टोंक से लेकर जयपुर तक सियासी हलचल, वसुंधरा राजे समर्थक खेमे में भारी उत्साह
राजस्थान की प्रदेश राजनीति में टोंक जिले का अपना एक विशेष महत्व है। ऐसे में वसुंधरा राजे के सलाहकार की पत्नी की इस धमाकेदार चुनावी जीत ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी नई हलचल पैदा कर दी है। जयपुर से लेकर टोंक तक भाजपा और विशेष रूप से वसुंधरा राजे समर्थक खेमे में इस जीत को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि यह जीत केवल एक पंचायत की जीत नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि जमीन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की पकड़ आज भी देहाती इलाकों में कितनी मजबूत है। चुनाव नतीजे आने के बाद नवनिर्वाचित महिला सरपंच का ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया और विजय जुलूस निकाला।
'गांव के सर्वांगीण विकास और जनसेवा का संकल्प रहेगा जारी': नवनिर्वाचित सरपंच का बयान
अपनी इस बड़ी चुनावी कामयाबी के बाद मीडिया और ग्रामीणों से रूबरू होते हुए नवनिर्वाचित सरपंच ने सभी क्षेत्रवासियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 17 सालों से गांव की जनता ने जिस तरह उनके परिवार पर अपना भरोसा और आशीर्वाद बनाए रखा है, वह उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि पिछले कार्यकाल की तरह इस बार भी गांव के सर्वांगीण विकास, शिक्षा के स्तर को सुधारने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पंचायती राज व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने पर उनका विशेष ध्यान रहेगा। उन्होंने साफ किया कि गांव की राजनीति से ऊपर उठकर हर वर्ग और हर परिवार की समस्याओं का समाधान करना ही भारद्वाज परिवार की पहली प्राथमिकता रहेगी।