जयपुर नगर निगम का अगला मेयर कौन? कोठारी और कर्णावत समेत ये 5 दिग्गज रेस में सबसे आगे
राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों केवल एक ही सवाल तैर रहा है कि जयपुर नगर निगम का अगला मेयर कौन बनेगा। नगर निगम के शीर्ष पद को हथियाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर अंदरूनी खींचतान और नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। इस दौड़ में कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं के नाम उभरकर सामने आ रहे हैं, जिससे शहर की राजनीति में हलचल मच गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा भी कई दौर की अनौपचारिक वार्ताएं की जा चुकी हैं ताकि किसी ऐसे चेहरे पर सहमति बनाई जा सके जो शहर के विकास के साथ-साथ पार्टी के संगठन को भी मजबूती प्रदान कर सके।
मेयर पद की रेस में सबसे आगे चल रहे हैं ये 5 प्रमुख दावेदार
जयपुर के महापौर पद को लेकर जिन 5 प्रमुख नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में बने हुए हैं, उनमें कोठारी और कर्णावत प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन दोनों ही दिग्गज नेताओं के पास पार्टी संगठन और स्थानीय निकाय प्रशासन में काम करने का लंबा अनुभव मौजूद है। इसके अलावा तीन अन्य स्थानीय पार्षदों व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के नाम भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन 5 दावेदारों में से किसी एक के नाम पर अंतिम मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है। सभी दावेदार अपने-अपने स्तर पर पार्टी के आलाकमान और प्रदेश स्तर के बड़े नेताओं से संपर्क साधने में जुटे हुए हैं।
कोठारी और कर्णावत के राजनीतिक कद और अनुभव का गणित
दावेदारों की सूची में शीर्ष पर चल रहे कोठारी का जयपुर शहर की स्थानीय राजनीति में मजबूत जनाधार माना जाता है। उन्होंने लंबे समय तक वार्ड स्तर से लेकर जिला स्तर तक संगठन के कार्यों को बखूबी संभाला है। वहीं दूसरी ओर, कर्णावत की पहचान एक सुलझे हुए और रणनीतिकार नेता के रूप में होती है, जिनकी पकड़ पार्षदों और स्थानीय कार्यकर्ताओं पर काफी अच्छी मानी जाती है। इन दोनों नेताओं के प्रशासनिक अनुभव और जमीनी पकड़ को देखते हुए पार्टी नेतृत्व के सामने भी एक योग्य चेहरे का चयन करने की कड़ी चुनौती बनी हुई है।
क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने की कवायद में जुटी बीजेपी
जयपुर नगर निगम में मेयर का चुनाव सिर्फ एक प्रशासनिक पद का चयन नहीं है, बल्कि आगामी राजनीतिक दिशा तय करने के लिहाज से भी बेहद अहम है। बीजेपी आलाकमान जयपुर शहर के जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला लेना चाहता है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मेयर का चयन ऐसा हो जिससे आगामी विधानसभा या अन्य स्थानीय चुनावों में पार्टी को राजनीतिक लाभ पहुंचे। यही कारण है कि दावेदारों के जनाधार, बेदाग छवि और सर्वस्वीकार्यता का गहन मूल्यांकन किया जा रहा है।
पार्षदों के समर्थन और गुटबाजी को शांत करने की चुनौती
मेयर चुनाव के दौरान सबसे बड़ी चुनौती पार्षदों को एकजुट रखना और पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की गुटबाजी को पनपने से रोकना है। जयपुर नगर निगम के भीतर अलग-अलग गुटों के पार्षद अपने-अपने पसंदीदा नेताओं का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और पर्यवेक्षकों की मुख्य जिम्मेदारी यह होगी कि वे सभी गुटों को साधते हुए सर्वसम्मति से किसी एक नाम पर फैसला कराएं। यदि पार्षदों में किसी नाम को लेकर असंतोष पनपता है, तो मतदान या समर्थन के दौरान समीकरण बिगड़ भी सकते हैं।
जनहित और शहर के विकास की प्राथमिकताओं पर रहेगा जोर
जयपुर शहर के नागरिकों और व्यापारिक संगठनों की निगाहें भी इस बात पर टिकी हुई हैं कि नए मेयर के रूप में कौन कमान संभालता है। गुलाबी नगरी जयपुर में सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण, ट्रैफिक प्रबंधन, हेरिटेज संरक्षण और सीवरेज जैसी मूलभूत समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। ऐसे में जो भी नया मेयर बनेगा, उसके कंधों पर जयपुर को स्मार्ट और स्वच्छ शहर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। आम जनता एक ऐसे जनप्रतिनिधि की उम्मीद कर रही है जो कागजी वादों से इतर जमीन पर उतरकर कार्य करे।
पार्टी आलाकमान जल्द कर सकता है नए मेयर के नाम का आधिकारिक ऐलान
राजस्थान बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और पर्यवेक्षकों ने संभावित उम्मीदवारों की सूची और पार्षदों का फीडबैक केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व को सौंप दिया है। माना जा रहा है कि उच्च स्तर पर गहन मंथन के बाद अगले एक से दो दिनों के भीतर जयपुर के नए मेयर के नाम की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि नाम का ऐलान होते ही नामांकरण और शपथ ग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी तेजी से पूरी की जाएंगी, जिससे नगर निगम का कामकाज सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।