निकाय चुनाव में खूनी संघर्ष: ताबड़तोड़ फायरिंग, बैरिकेडिंग तोड़कर पुलिस पर हमला और पथराव
राजस्थान के अनूपगढ़ जिले के श्रीविजयनगर से एक बेहद सनसनीखेज और दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां निकाय चुनाव के दौरान लोकतंत्र का महापर्व अखाड़े में तब्दील हो गया। मतदान प्रक्रिया के दौरान दो पक्षों के बीच उपजे तनाव ने कुछ ही पलों में हिंसक रूप ले लिया और देखते ही देखते वहां ताबड़तोड़ फायरिंग, पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने और खाकी पर ही कातिलाना हमले की घटनाएं शुरू हो गईं। चुनावी रंजिश और वर्चस्व की इस जंग में उपद्रवियों ने कानून और पुलिस प्रशासन के सारे इकबाल को ताक पर रख दिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद जिस तरह से इस छोटे से कस्बे में सरेआम गोलियां चलीं और पथराव हुआ, उसने पूरे प्रशासनिक महंके में हड़कंप मचा दिया है।
भारतीय लोकतंत्र में चुनाव हमेशा से जनता की आवाज और अधिकारों का प्रतीक माने जाते हैं, लेकिन जब कुछ असामाजिक तत्व और बाहुबली प्रवृत्ति के लोग चुनावी प्रक्रिया को अपनी ताकत से हाईजैक करने की कोशिश करते हैं, तो ऐसी डरावनी तस्वीरें सामने आती हैं। श्रीविजयनगर के इस निकाय चुनाव में मतदान के दिन सुबह से ही छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर तनातनी का माहौल बना हुआ था, जो दोपहर होते-होते एक बड़े हिंसक बवंडर में बदल गया। पुलिस और सुरक्षा बलों को नियंत्रित करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन उपद्रवियों का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर था कि उन्होंने सुरक्षा कर्मियों को भी नहीं बख्शा। आइए इस पूरी घटना की हर एक परत को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि आखिर किस वजह से श्रीविजयनगर की सड़कों पर ऐसा तांडव देखने को मिला।
कैसे शुरू हुआ विवाद और मतदान केंद्रों के बाहर क्यों भड़की हिंसा?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीविजयनगर में निकाय चुनाव के लिए हो रहे मतदान के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक और प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान दो प्रमुख गुटों के बीच किसी फर्जी मतदान या मतदाताओं को अंदर ले जाने की बात को लेकर तीखी बहस छिड़ गई, जो कुछ ही मिनटों में गाली-गलौज और हाथापाई में बदल गई। जब तक पुलिस के जवान स्थिति को संभाल पाते, तब तक दोनों तरफ से लाठी-डंडे और पत्थर लेकर सैकड़ों लोग आमने-सामने आ चुके थे। माहौल को तनावपूर्ण होते देख स्थानीय दुकानदारों ने अपनी दुकानें धड़ाधड़ बंद कर लीं और सड़कों पर सन्नाटा पसर गया, जिसके कुछ ही पलों बाद माहौल चीख-पुकार और गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा।
हिंसा पर उतारू उपद्रवियों ने न केवल एक-दूसरे के खिलाफ पथराव किया, बल्कि मतदान केंद्र के आसपास खड़े वाहनों को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। चुनाव कवर करने गए कुछ स्थानीय पत्रकारों और कैमरामैन के साथ भी बदसलूकी की खबरें सामने आईं, जिससे यह साफ हो गया कि उपद्रवियों के मन में कानून या प्रेस किसी का भी कोई डर नहीं बचा था। पुलिस ने जब भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग करने की कोशिश की, तो स्थिति और अधिक बेकाबू हो गई और भीड़ ने सीधे तौर पर पुलिस बल को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए।
बैरिकेडिंग तोड़कर पुलिस पर हमला और सरेआम ताबड़तोड़ फायरिंग से सहमा पूरा कस्बा
श्रीविजयनगर की इस हिंसा का सबसे डरावना पहलू यह रहा कि बेकाबू उपद्रवियों ने पुलिस द्वारा लगाई गई सुरक्षा बैरिकेडिंग को बलपूर्वक तोड़ डाला और कानून के रखवालों पर ही हमला बोल दिया। भीड़ के भीतर मौजूद कुछ आपराधिक तत्वों ने दहशत फैलाने के इरादे से सरेआम हवा में और लोगों की तरफ निशाना साधते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी। गोलियों की आवाज सुनते ही मतदान केंद्र के भीतर मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और आम मतदाताओं की सांसें अटक गईं। पुलिस के जवानों ने अत्यधिक संयम और सूझबूझ का परिचय देते हुए स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन उग्र भीड़ के आगे शुरुआती दौर में पुलिस बल कम पड़ता हुआ नजर आया।
इस हिंसक झड़प और पथराव में कई पुलिसकर्मियों समेत दोनों पक्षों के कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कुछ गंभीर रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। पुलिस पर हमले की सूचना मिलते ही जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल, आरएसी (RAC) के जवानों और वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया, जिसके बाद इलाके में फ्लैग मार्च निकाला गया और स्थिति पर धीरे-धीरे नियंत्रण पाया जा सका।
प्रशासन और पुलिस की सख्त कार्रवाई: उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही खाकी
घटना के तुरंत बाद श्रीविजयनगर और पूरे अनूपगढ़ जिले के प्रशासनिक व पुलिस महकमे में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। आईजी और एसपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर कैंप कर रहे हैं और हर एक गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। पुलिस ने उपद्रवियों द्वारा किए गए इस तांडव के वीडियो और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू कर दिया है ताकि एक-एक दंगाई की पहचान करके उसे कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके। प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि चुनाव में खलल डालने, कानून हाथ में लेने और पुलिस पर हमला करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और गंभीर धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह की हिंसा से न केवल शहर का माहौल खराब होता है, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा को भी भारी ठेस पहुंचती है। प्रशासन ने क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी है और अगले कुछ दिनों तक लगातार गश्त करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या प्रतिशोध की कार्रवाई को समय रहते रोका जा सके। राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शांति की अपील की है, लेकिन इस घटना के बाद स्थानीय सियासत पूरी तरह गरमा गई है और एक-दूसरे पर हार के डर से हिंसा कराने के आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है।
निकाय चुनावों में इस प्रकार की हिंसा क्यों बन रही है एक गंभीर चिंता का विषय?
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव ग्रामीण और शहरी विकास की सबसे पहली और मजबूत सीढ़ी माने जाते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि अक्सर इन्हीं छोटे चुनावों में स्थानीय वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण सबसे ज्यादा खूनी संघर्ष देखने को मिलते हैं। श्रीविजयनगर की यह घटना इस बात का जीता-जाता उदाहरण है कि कैसे छोटी सी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सहनशक्ति की कमी समाज में खून-खराबे का कारण बन जाती है। जब तक राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं को संयम का पाठ नहीं पढ़ाएंगे और प्रशासन चुनावों में सुरक्षा के पुख्ता एवं कड़े इंतजाम नहीं करेगा, तब तक लोकतंत्र के इस पावन पर्व पर ऐसे काले धब्बे लगते रहेंगे।
आम जनता अब यही चाहती है कि चुनाव चाहे कोई भी हो, लोगों की सुरक्षा और शहर की शांति सर्वोपरि होनी चाहिए। श्रीविजयनगर के लोग इस घटना के बाद सदमे में हैं और वे जल्द से जल्द दोषियों की गिरफ्तारी तथा कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की अराजकता की कोई दोबारा हिम्मत न कर सके। पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर पूरे राजस्थान की नजर टिकी हुई है कि वे इन उपद्रवियों के खिलाफ कितनी सख्ती से पेश आते हैं।