सांवलिया सेठ के दरबार में सब कुछ अर्पित, भक्त ने दान कर दिया 10 बीघा खेत और चार मंजिला आलीशान मकान
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित भगवान सांवलिया सेठ (Sanwaliya Ji Temple) की महिमा और चमत्कार से जुड़ी कहानियां देश-दुनिया में फैली हुई हैं, जहां श्रद्धालु अपनी अटूट आस्था के तहत अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा भगवान के चरणों में समर्पित कर देते हैं। इसी कड़ी में एक ऐसा हैरान करने वाला और भावुक मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया है। एक परम भक्त ने अपनी अगाध श्रद्धा और अनोखी मन्नत के चलते अपनी गाढ़ी कमाई से बनाई गई बहुमूल्य संपत्ति—यानी 10 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि और एक चार मंजिला विशाल मकान—बिना किसी संकोच के सीधे सांवलिया सेठ मंदिर मंडल ट्रस्ट के नाम दान कर दी है।
सांवलिया सेठ के दरबार में क्यों पहुंच रहा है इतना बड़ा चढ़ावा?
सांवलिया सेठ को कलयुग का राजा और व्यापारियों का मुख्य देवता माना जाता है, ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यापारी या भक्त यहां मन्नत मांगता है, भगवान उसकी झोली खुशियों से भर देते हैं। भक्त का मानना है कि उसने अपने जीवन में जो कुछ भी कमाया और हासिल किया है, वह सब उसी सांवलिया सेठ की कृपा का परिणाम है। अपनी इसी गहरी आस्था और कृतज्ञता को प्रकट करने के लिए उसने अपनी करोड़ों की संपत्ति मंदिर ट्रस्ट को सौंप दी है, ताकि उस संपत्ति से आने वाली आय का उपयोग धार्मिक और सामाजिक कार्यों में किया जा सके।
ट्रस्ट के नाम हुई संपत्ति और कानूनी प्रक्रिया पूरी
भक्त द्वारा अपनी चल-अचल संपत्ति मंदिर ट्रस्ट के नाम करने के बाद से ही इलाके में इस बात की चर्चा जोरों पर है। सांवलिया जी मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने भी इस बड़े दान की पुष्टि की है और कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए कागजात अपने कब्जे में ले लिए हैं। ट्रस्ट द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि दान में मिली इस संपत्ति का प्रबंधन और इससे होने वाली आय का उपयोग पारदर्शी तरीके से मंदिर के विकास कार्यों और जरूरतमंदों की सेवा के लिए किया जाएगा।
आस्था की इस अनोखी दास्तान ने मोहा सबका मन
सोशल मीडिया और स्थानीय गलियारों में इस भक्त की दरियादिली और सांवलिया सेठ के प्रति उसकी अटूट भक्ति की खूब सराहना हो रही है। आज के भौतिकवादी दौर में जहां लोग अपनी संपत्ति को लेकर कोर्ट-कचहरी और विवादों में उलझे रहते हैं, वहीं इस प्रकार का समर्पण इतिहास रच देता है। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि राजस्थान की धरती पर लोक-आस्था और भगवान के प्रति प्रेम का बंधन कितना गहरा और पवित्र है, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही है।