बिना वोटिंग ही साफ हो गया मुकाबला, राज्यसभा चुनाव में सतीश पूनिया, अलका लांबा और धर्मनारायण डांगी निर्विरोध निर्वाचित
राजस्थान की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है और बिना एक भी वोट पड़े तीनों उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला हो गया है। नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग ने भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सतीश पूनिया, कांग्रेस की फायरब्रांड नेत्री अलका लांबा और भाजपा के धर्मनारायण डांगी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया है। चुनावी मैदान में केवल तीन ही प्रत्याशी होने के कारण मतदान कराने की नौबत ही नहीं आई। रिटर्निंग ऑफिसर ने जयपुर स्थित विधानसभा भवन में सभी नवनिर्वाचित सांसदों के प्रतिनिधियों और नेताओं को आधिकारिक तौर पर जीत का प्रमाण पत्र सौंप दिया है।
एनडीए और कांग्रेस के खाते में गईं सीटें, विधानसभा के संख्या बल ने तय किया समीकरण
राजस्थान विधानसभा के मौजूदा संख्या बल को देखते हुए यह पहले से ही माना जा रहा था कि तीन सीटों में से दो सीटें सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एक सीट मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के खाते में जाएगी। दोनों ही प्रमुख दलों ने अपनी ताकत और गणित को भांपते हुए उतने ही उम्मीदवार मैदान में उतारे, जितने वे आसानी से जिता सकते थे। इसी वजह से किसी भी अन्य निर्दलीय या तीसरे दल के प्रत्याशी ने पर्चा दाखिल नहीं किया। सतीश पूनिया और धर्मनारायण डांगी की जीत से जहां उच्च सदन में भाजपा की स्थिति और मजबूत हुई है, वहीं अलका लांबा के चयन से कांग्रेस ने अपनी उपस्थिति को बरकरार रखा है। इस निर्विरोध निर्वाचन से दोनों दलों ने चुनावी खर्च और समय की बड़ी बचत की है।
दिल्ली की राजनीति में मचेगी रार, तीनों कद्दावर चेहरे संसद में उठाएंगे राजस्थान की आवाज
सदन से जीत का सर्टिफिकेट मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में बधाइयों का तांता लग गया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजना पार्टी का एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिससे राजस्थान के स्थानीय जाट समीकरणों को भी साधने की कोशिश की गई है। वहीं, दिल्ली और देश की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर अलका लांबा के राज्यसभा पहुंचने से संसद के भीतर कांग्रेस को एक आक्रामक आवाज मिलने वाली है। इसके साथ ही मेवाड़ अंचल के बड़े आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले धर्मनारायण डांगी की जीत को भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तीनों नेताओं ने भरोसा दिलाया है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान के विकास और पानी-बिजली जैसे बुनियादी मुद्दों को संसद में पुरजोर तरीके से उठाएंगे।
स्क्रूटनी के बाद अंतिम मुहर, अब सीधे दिल्ली के लिए उड़ान भरेंगे तीनों नए माननीय
निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच (स्क्रूटनी) की गई थी, जिसमें सभी तीनों उम्मीदवारों के पर्चे पूरी तरह वैध पाए गए थे। नाम वापसी के अंतिम दिन दोपहर तीन बजे जैसे ही समय सीमा समाप्त हुई, निर्वाचन विभाग ने चुनावी प्रक्रिया पूरी होने की घोषणा कर दी। प्रमाण पत्र लेने के लिए विधानसभा परिसर में नेताओं और उनके समर्थकों का भारी जमावड़ा देखा गया। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ नवनिर्वाचित सांसदों का स्वागत किया। इस निर्विरोध जीत के साथ ही अब राजस्थान से राज्यसभा जाने वाले इन नए 'माननीयों' का सफर शुरू हो गया है, जो जल्द ही देश की संसद में सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।