सीकर पंचायत चुनाव 2026: जिला परिषद के 49 वार्डों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया हुई पूरी
राजस्थान के शेखावाटी अंचल के राजनीतिक केंद्र सीकर जिले से इस वक्त पंचायती राज चुनावों को लेकर एक बहुत बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। जिला मुख्यालय पर प्रशासन की देखरेख में आयोजित पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सीकर जिले में जिला परिषद के कुल 49 सदस्यों के लिए वार्डवार आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के संपन्न होने के साथ ही जिले के ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी अचानक चरम पर पहुंच गई है और भावी प्रत्याशियों की धड़कनें तेज हो गई हैं। लंबे समय से इस बात का इंतजार किया जा रहा था कि किस वार्ड से कौन सा वर्ग चुनाव लड़ेगा और महिलाओं के लिए कितनी सीटें आरक्षित होंगी। लॉटरी निकलते ही कई दिग्गजों के समीकरण जहां पूरी तरह बदल गए हैं, वहीं नए चेहरों के लिए राजनीति में उतरने का नया रास्ता साफ हो गया है। इस विशेष रिपोर्ट में हम जानेंगे कि सीकर जिला परिषद के आरक्षण का यह पूरा गणित क्या कहता है और आगामी चुनावों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
सीकर जिला परिषद के 49 सदस्यों के लिए आरक्षण का पूरा गणित और लॉटरी प्रक्रिया
पंचायती राज संस्थाओं के आगामी आम चुनावों को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों के दायरे में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। जिला कलक्टर की मौजूदगी और प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में जिला परिषद सभागार में वार्डवार आरक्षण की पर्चियां निकाली गईं। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, स्थानीय नेता और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सीकर जिले में कुल 49 जिला परिषद वार्ड बनाए गए हैं, जिनका प्रशासनिक परिसीमन पहले ही पूरा किया जा चुका है। इन सभी 49 वार्डों के लिए एससी, एसटी, ओबीसी, सामान्य और महिलाओं के कोटे का निर्धारण रोटेशन पद्धति के आधार पर किया गया है। प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि तय प्रावधानों के अनुसार हर श्रेणी को उसका बनता हुआ प्रतिनिधित्व पूरी पारदर्शिता के साथ मिले।
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण और सीटों का बदलता हुआ स्वरूप
राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत महिलाओं को हमेशा से सशक्त प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान रहा है, जिसके तहत इस बार भी सभी श्रेणियों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। सीकर जिला परिषद के 49 सदस्यों में भी महिला आरक्षण के इस फॉर्मूले का पूरी तरह से पालन किया गया है। इसके अलावा, जिला प्रमुख के पद के लिए पहले ही लॉटरी निकाली जा चुकी है, जिसके तहत सीकर में ओबीसी वर्ग की महिला के लिए जिला प्रमुख का पद आरक्षित हुआ है। अब वार्डवार लॉटरी खुलने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि किस विशिष्ट वार्ड से महिला उम्मीदवार मैदान में उतर सकती हैं और कौन से वार्ड सामान्य पुरुष या आरक्षित वर्ग के कोटे में गए हैं। इस स्थिति के साफ होने से गांवों की चौपालों पर होने वाली चुनावी चर्चाएं अब हकीकत में तब्दील होने लगी हैं।
आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही गांवों में राजनीतिक दलों की हलचल और रणनीति तेज
जैसे ही सीकर जिला परिषद के 49 वार्डों का आरक्षण घोषित हुआ, वैसे ही ग्रामीण राजनीति में भूचाल सा आ गया। जिन संभावित प्रत्याशियों ने महीनों से अपने-अपने इलाकों में जमीन तैयार कर रखी थी, यदि उनका वार्ड उनकी मनचाही श्रेणी के अनुसार आरक्षित नहीं हुआ है, तो उन्हें अब अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ रहा है। इसके विपरीत, जिन लोगों के वार्ड उनकी अनुकूल कैटेगरी में आ गए हैं, उनके खेमों में जश्न का माहौल है। भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस (Congress) और अन्य स्थानीय दलों के रणनीतिकार अब अपने-अपने पाले को मजबूत करने के लिए बैठकों का दौर शुरू कर चुके हैं। हर दल की कोशिश यही है कि वह मजबूत और जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश करके उन्हें मैदान में उतारे ताकि जिला परिषद में बहुमत हासिल किया जा सके।
आगामी चुनाव कार्यक्रम और प्रशासनिक तैयारियां
जिला परिषद सदस्यों के साथ-साथ पंचायत समिति सदस्यों और प्रधान पदों की आरक्षण प्रक्रिया भी तय शेड्यूल के अनुसार पूरी की जा रही है। इसके बाद उपखंड स्तर पर सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि आरक्षण की यह पूरी कवायद पूरी होने के तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किसी भी वक्त पंचायत चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। उच्च न्यायालय के निर्देशों और तय समय-सीमा के अनुसार 15 नवंबर तक पूरी चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में सीकर जिले के गांवों में अब सर्दी के इस मौसम में सियासी पारा काफी हाई रहने वाला है और हर कोई चुनावी जंग के मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है।