राजस्थान में गोवंश सुरक्षा को लेकर एक्शन मोड में सीएम भजनलाल शर्मा, लम्पी रोग की रोकथाम के लिए दिए कड़े निर्देश
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने राज्य में गोवंश की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को लेकर एक बार फिर से बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजधानी जयपुर में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में गोवंश की रक्षा और उनके कल्याण के लिए किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में लम्पी वायरस और अन्य संक्रमणों की वजह से प्रदेश के मूक पशुधन को जिस गंभीर संकट का सामना करना पड़ा था, उसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार अब पूरी तरह से सतर्क और अग्रिम तैयारियों में जुट गई है। इस महत्वपूर्ण बैठक में पशुपालन विभाग के आला अधिकारियों के साथ-साथ कई वरिष्ठ मंत्री भी मौजूद रहे, जहां राज्य भर की गोवंश शालाओं और पशु चिकित्सा केंद्रों की जमीनी हकीकत का बारीकी से जायजा लिया गया। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा है कि गायों की सेवा और उनकी सुरक्षा हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए सभी जिलों में इसके लिए पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।
लम्पी रोग के खतरे से निपटने के लिए उठाए गए एहतियाती कदम
बैठक के दौरान मुख्य रूप से लम्पी स्किन डिजीज के संभावित प्रकोप और उसके बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई ताकि आने वाले मौसम में इस बीमारी से पशुओं को सुरक्षित रखा जा सके। सीएम भजनलाल शर्मा ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे राज्य की सभी गौशालाओं में टीकाकरण अभियान को युद्धस्तर पर चलाएं और यह सुनिश्चित करें कि हर एक गोवंश तक समय पर वैक्सीन पहुंच सके। इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों और ग्रामीण इलाकों में पशु चिकित्सा दलों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने के आदेश दिए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध मामले के सामने आते ही तुरंत प्रभाव से इलाज शुरू किया जा सके। सरकार की इस सक्रियता का मुख्य उद्देश्य यही है कि इस बार किसी भी पशु की जान इस खतरनाक बीमारी की वजह से न जाए और समय रहते संक्रमण की चेन को पूरी तरह से तोड़ दिया जाए। पशुपालन विभाग को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जिलों में पर्याप्त मात्रा में दवाइयों और मेडिकल उपकरणों का स्टॉक हमेशा उपलब्ध रखें ताकि आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
गोवंश संरक्षण और चारे-पानी की व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा
लम्पी रोग के नियंत्रण के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने प्रदेश भर की गौशालाओं में मिलने वाले अनुदान, चारे और पानी की व्यवस्थाओं की भी बेहद कड़ाई से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकार द्वारा गोवंश के भरण-पोषण के लिए जो सहायता राशि दी जा रही है, उसका वितरण पूरी पारदर्शिता के साथ समय पर होना चाहिए ताकि किसी भी गौशाला संचालक को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, गर्मियों और बरसात के मौसम में चारे की कोई कमी न हो, इसके लिए अभी से बफर स्टॉक तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि हर गौशाला में बीमार और घायल पशुओं के इलाज के लिए शेड और वेटरनरी डॉक्टरों की नियमित विजिट की व्यवस्था हो, जिससे मूक पशुओं को बेहतर चिकित्सा मिल सके। आवारा गोवंश की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय निकायों और जिला प्रशासन को मिलकर विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि सड़कों पर घूमने वाले गोवंश को सुरक्षित स्थानों या आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जा सके।
आम जनता और गौसेवकों की सहभागिता पर विशेष जोर
सरकार का मानना है कि गोवंश की सुरक्षा और सेवा का यह कार्य केवल अकेले प्रशासन के बूते का नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता, भामाशाहों और स्थानीय गौसेवकों की सक्रिय भागीदारी होना भी बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बैठक में यह सुझाव भी दिया कि समाज के सभी वर्गों को गोवंश संरक्षण अभियान से जोड़ा जाए ताकि जनसहयोग के माध्यम से गौशालाओं की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। प्रदेश के विभिन्न जिलों में गोभक्तों और सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी प्रयासों को पूरा समर्थन और प्रोत्साहन देने के लिए हमेशा तैयार है। प्रशासनिक अमले को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से गौशालाओं का औचक निरीक्षण करें और वहां दी जाने वाली सुविधाओं की गुणवत्ता की खुद मॉनिटरिंग करें। जनता के बीच जाकर इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने की बात कही गई है जिससे लोग अपने आसपास के पशुओं की देखभाल के प्रति और अधिक संवेदनशील बन सकें।
राजस्थान के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में गोवंश का महत्व
राजस्थान की सांस्कृतिक और राजनीतिक फिजा में गोवंश का मुद्दा हमेशा से ही एक बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थान रखता आया है। राज्य की सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गायों की सुरक्षा और उनके कल्याण को लेकर कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जो जमीनी स्तर पर असर भी दिखा रहे हैं। इस ताजा उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि सरकार आने वाले समय में पशुधन सुरक्षा को लेकर और अधिक कड़े और परिणाममूलक कदम उठाने जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार का यह कदम न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मददगार साबित होगा बल्कि पशुपालकों के मन में भी एक बड़ा विश्वास पैदा करेगा। लम्पी रोग जैसी आपदाओं से निपटने के लिए सरकार की यह अग्रिम योजना निश्चित रूप से प्रदेश के लाखों पशुपालकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है, जिससे आने वाले दिनों में गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।