जयपुर, जोधपुर, कोटा सहित 6 बड़े नगर निगमों में कल होने वाले मतदान को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर
राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी ने पारा पूरी तरह से हाई कर रखा है और पहले चरण के मतदान के बाद अब सबकी निगाहें दूसरे तथा अंतिम चरण के रण पर टिकी हुई हैं। राज्य के सबसे बड़े शहरी इलाकों यानी जयपुर, जोधपुर और कोटा सहित कुल छह प्रमुख नगर निगमों में कल यानी शुक्रवार को होने वाले मतदान को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। इस चुनाव में कुल 87 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे और मैदान में उतरे हजारों प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में बंद करेंगे। खास तौर पर मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र और उनके प्रभाव वाले इलाकों में सियासी समीकरणों को साधने के लिए दोनों ही प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे इस मुकाबला का रोमांच और अधिक बढ़ गया है।
#दूसरे चरण के इस महासमर में जयपुर, जोधपुर और कोटा पर टिकी देश भर की नजरें
राजस्थान के निकाय चुनावों के इस दूसरे चरण के तहत जिन छह बड़े नगर निगमों में कल मतदान होना है, उनमें राजधानी जयपुर के अलावा जोधपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर के इलाके मुख्य रूप से शामिल हैं। इन सभी नगर निगम क्षेत्रों में कुल 4774 वार्डों के लिए वोट डाले जाएंगे, जिसके लिए निर्वाचन आयोग की ओर से लगभग 9758 से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं। राज्य के इन प्रमुख शहरी केंद्रों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ पार्टी की साख दांव पर लगी हुई है, क्योंकि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले इसे जनता का मूड भांपने का सबसे बड़ा पैमाना माना जा रहा है। जयपुर नगर निगम में जहाँ सबसे ज्यादा 150 वार्डों के लिए घमासान मचा हुआ है, वहीं अन्य निगमों में भी सौ-सौ और अस्सी-अस्सी वार्डों के पार्षद पद के लिए घमासान छिड़ा हुआ है। राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने इन इलाकों में अपनी पूरी प्रतिष्ठा झोंक रखी है ताकि शहरी मतदाताओं को अपने पक्ष में रिझाया जा सके।
#मुख्यमंत्री के गढ़ और खास इलाकों में क्यों फंसा हुआ है प्रतिष्ठा का पेंच
इस पूरे चुनाव प्रचार के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही है कि सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और खुद मुख्यमंत्री के प्रभाव वाले क्षेत्रों में किस तरह से राजनीतिक खींचतान देखने को मिली है। जानकारों का कहना है कि कई सीटों पर अपनों की बगावत और भीतरघात ने दोनों ही दलों के बड़े नेताओं की नींद उड़ा रखी है, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ने खुद धुआंधार दौरे और ताबड़तोड़ रैलियां करके पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पनपे असंतोष और जातिगत समीकरणों के पेंच ने परिणामों को लेकर संशय बरकरार रखा है। विरोधी दल इस बात का पूरा फायदा उठाने की फिराक में हैं कि यदि सत्ता पक्ष को उसके अपने ही गढ़ में शिकस्त दी जा सके, तो यह आने वाले समय में एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश साबित होगा। यही वजह है कि हर एक वार्ड और हर एक बूथ पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
#मतदान की पूरी तैयारियां और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच कल होगा फैसला
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार कल सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे, जिसके लिए सुरक्षा के बेहद कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकें। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जिन मतदाताओं के पास पारंपरिक पहचान पत्र नहीं हैं, वे आयोग द्वारा निर्धारित अन्य वैकल्पिक फोटोयुक्त दस्तावेजों को दिखाकर आसानी से वोट डाल सकें। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी की निगाहें आगामी 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर टिक जाएंगी, जब यह साफ हो जाएगा कि इन दिग्गजों के गढ़ में ऊंट किस करवट बैठता है और जनता ने किसके सिर पर जीत का सेहरा बांधा है।