खुली जेल के बंदी का थाईलैंड टूर': सलाखों के पीछे से विदेश यात्रा का सनसनीखेज मामला
कानून व्यवस्था और जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाला एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। एक तरफ जहां जेलों में बंद कैदियों को नियमों के दायरे में रखने और सुधारने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ खुली जेल (Open Jail) में अपनी सजा काट रहा एक दुर्दांत कैदी जेल के नियमों और सुरक्षा चक्र को चकमा देकर सीधे 'थैंक्सगिविंग या हॉलिडे टूर' पर थाईलैंड (Thailand) घूमने निकल गया। हैरानी की बात तो यह है कि जेल की चारदीवारी से बाहर कदम रखने और अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने के लिए पासपोर्ट बनवाने से लेकर वीजा और कागजी कार्रवाई तक, इस पूरे खेल में जेल के भीतर बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की गहरी संलिप्तता सामने आई है। इस हाई-प्रोफाइल लापरवाही के खुलासे के बाद अब शासन स्तर पर बड़े अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं और जल्द ही कई भ्रष्ट चेहरों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
खुली जेल के नियमों की धज्जियां: कैसे एक सजायाफ्ता कैदी पहुंच गया विदेशी धरती पर?
खुली जेल का मूल कॉन्सेप्ट कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके पुनर्वास के लिए बनाया गया है, जहां वे दिन में बाहर काम कर सकते हैं और शाम को तय समय पर जेल लौटते हैं या परिसर में रहते हैं। लेकिन इस व्यवस्था का खुलेआम दुरुपयोग करते हुए संबंधित बंदी ने जेल प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में फर्जीवाड़ा किया, बल्कि चुपचाप देश की सीमा लांघकर थाईलैंड की उड़ान भर ली। सूत्रों के अनुसार, जब इस बात की भनक खुफिया एजेंसियों और उच्चाधिकारियों को लगी कि एक सजायाफ्ता अपराधी विदेश यात्रा कर रहा है, तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। सवाल यह उठता है कि बिना पुलिस वेरिफिकेशन और जेल अधीक्षक की लिखित अनुमति के पासपोर्ट कैसे जारी हो गया और जब कैदी महीनों गायब रहा, तो जेल के रजिस्टर में उसकी हाजिरी कौन दर्ज कर रहा था?
जेल के भीतर का सिंडिकेट बेनकाब: मिलीभगत करने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज
इस पूरे मामले की शुरुआती जांच में यह बात साफ हो गई है कि बिना अंदरूनी संरक्षण और मोटी घूसखोरी के इस तरह का खेल संभव ही नहीं है। जेल के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए जेल मैनुअल के नियमों को ताक पर रख दिया और इस कैदी को विदेश भागने में पूरी मदद पहुंचाई। जांच एजेंसियों अब उन तमाम दस्तावेजों को खंगाल रही हैं जिनके जरिए इस कैदी को खुली जेल में विशेष सहूलियतें दी जा रही थीं। गृह विभाग और उच्च अधिकारियों ने इस गंभीर लापरवाही को बेहद सख्ती से लिया है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस सिंडिकेट में शामिल छोटे से लेकर बड़े अधिकारियों तक को बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट अंतिम चरण में है और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ तत्काल निलंबन और आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
प्रशासनिक सुधारों की मांग और जेल सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद देश भर की जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों के मॉनिटरी सिस्टम पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि खुली जेलों के नियमों का इस तरह दुरुपयोग होने लगा, तो न्याय व्यवस्था और कानून के इकबाल पर से जनता का भरोसा उठ जाएगा। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में सरकार से कड़े कदम उठाने और जेल प्रशासन में बैठे भ्रष्ट तंत्र को नेस्तनाबूद करने की मांग की है। बहरहाल, थाईलैंड टूर करने वाले इस कैदी की वापसी और उसकी मदद करने वाले प्रशासनिक चेहरों के बेनकाब होने से यह तय हो गया है कि आने वाले दिनों में जेल विभाग में एक बहुत बड़ी गाज गिरने वाली है।