भंवरी देवी मर्डर केस में नया मोड़, मृत मानकर अनुकंपा पर नौकरी दी तो फिर पेंशन देने में अड़ंगा क्यों? हाईकोर्ट सख्त

भंवरी देवी मर्डर केस में नया मोड़, मृत मानकर अनुकंपा पर नौकरी दी तो फिर पेंशन देने में अड़ंगा क्यों? हाईकोर्ट सख्त

राजस्थान के सबसे चर्चित और बहुआयामी कानूनी मामलों में से एक 'भंवरी देवी हत्याकांड' (Bhanwari Devi Murder Case) एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार राजस्थान हाईकोर्ट ने भंवरी देवी के वारिसों को पारिवारिक पेंशन न मिलने के मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जोधपुर स्थित मुख्य पीठ में इस मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायाधीश ने सरकारी सिस्टम की दोहरी नीति को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जब सरकार ने इस पूरे मामले की हकीकत को स्वीकार करते हुए पीड़िता के वारिस को अनुकंपा नियुक्ति दे दी, तो फिर पेंशन जारी करने में इतनी देरी और आनाकानी क्यों की जा रही है?

सरकारी तंत्र की दोहरी नीति पर अदालत की तीखी टिप्पणी, न्याय में देरी पर जताई नाराजगी

भंवरी देवी के आश्रितों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार की कानूनी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि एक तरफ सरकारी विभाग भंवरी देवी को मृत मानते हुए उनके आश्रित बेटे या बेटी को सरकारी नौकरी दे चुका है, जो इस बात का सीधा प्रमाण है कि विभाग ने उनकी मृत्यु को रिकॉर्ड पर स्वीकार कर लिया है। लेकिन जब बात उसी मृतक कर्मचारी की पेंशन और वित्तीय लाभों की आती है, तो कानूनी दांव-पेंच और कागजी औपचारिकताओं का बहाना बनाकर परिवार को परेशान किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति पूरी तरह से अतार्किक और मानवाधिकारों के खिलाफ है।

भंवरी देवी के बच्चों को हक दिलाने के लिए हाईकोर्ट ने जारी किया अल्टीमेटम

जोधपुर और पूरे राजस्थान (Rajasthan Legal News) के प्रशासनिक गलियारों को हिला देने वाले इस आदेश में हाईकोर्ट ने सरकार को तुरंत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि सालों से परिवार इस वित्तीय सहायता के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, जबकि भंवरी देवी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम (ANM) के पद पर कार्यरत थीं। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक भंवरी देवी के वारिसों की पेंशन का मामला सुलझाकर रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो अदालत कड़े प्रशासनिक कदम उठाने के लिए मजबूर होगी।

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