घड़साना की पावन धरती पर किसानों का उग्र आंदोलन और हनुमान बेनीवाल का समर्थन
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के अंतर्गत आने वाले कृषि प्रधान इलाके घड़साना में इन दिनों किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। पानी, सिंचाई के पूरे हक, फसल के उचित दामों और प्रशासनिक बहसों को लेकर पिछले कई दिनों से स्थानीय किसान और मजदूर अनिश्चितकालीन धरने और प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं। किसानों की इस सुलगती आग में उस समय और अधिक घी पड़ गया जब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल अचानक आंदोलन स्थल पर पहुंच गए। बेनीवाल के पहुंचते ही वहां मौजूद हजारों किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी और उनका जोरदार स्वागत किया। हनुमान बेनीवाल ने किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी और सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकाली।
किसानों के बीच पहुंचे हनुमान बेनीवाल का सरकार पर तीखा हमला और खरी-खोटी
आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए हनुमान बेनीवाल ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अन्नदाता जो देश का पेट भरता है, उसे अपनी बुनियादी मांगों जैसे सिंचाई का पूरा पानी और फसलों के सही समर्थन मूल्य के लिए सड़कों पर धक्के खाने पड़ रहे हैं, जो बेहद शर्मनाक है। बेनीवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिकारी और राजनेता एसी कमरों में बैठकर किसानों की गाढ़ी मेहनत का मजाक उड़ा रहे हैं, जिसे आरएलपी और किसान कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बार-बार आश्वासन देने के बावजूद धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिसके कारण किसानों का सब्र अब जवाब देता जा रहा है।
सरकार को बड़ा अल्टीमेटम: मांगें पूरी नहीं हुई तो पूरे राजस्थान में होगा चक्का-जाम
घड़साना के मंच से हुंकार भरते हुए हनुमान बेनीवाल ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि किसानों की इन सभी जायज मांगों को बिना किसी देरी के तुरंत पूरा किया जाए। उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर आने वाले कुछ दिनों के भीतर प्रशासन ने नहरों में पूरा पानी छोड़ने और किसानों की अन्य समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो यह आंदोलन सिर्फ घड़साना तक सीमित नहीं रहेगा। आरएलपी सुप्रीमो ने चेतावनी दी कि इसके बाद पूरे राजस्थान में उग्र प्रदर्शन किए जाएंगे और प्रमुख राजमार्गों पर विशाल चक्का-जाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। बेनीवाल के इस आक्रामक तेवर के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।
स्थानीय किसानों में बढ़ा जोश और प्रशासन की बड़ी चौकसी
हनुमान बेनीवाल के इस समर्थन के बाद घड़साना किसान आंदोलन को एक नई राष्ट्रीय और प्रांतीय पहचान मिल गई है। सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय बाजारों तक इसी बात की चर्चा है कि क्या सरकार इस बड़े किसान नेता के अल्टीमेटम के आगे झुकेगी या टकराव का रास्ता और अधिक चौड़ा होगा। आंदोलन स्थल पर किसानों का उत्साह कई गुना बढ़ गया है और उन्होंने ऐलान कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। दूसरी ओर, संभावित तनाव और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर लिए हैं। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की अतिरिक्त कंपनियां तैनात कर दी गई हैं ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।
राजस्थान की राजनीति और आगामी कृषि समीकरणों पर क्या होगा असर
घड़साना से शुरू हुआ यह किसान आंदोलन अब धीरे-धीरे पूरे मरुधरा की राजनीति के केंद्र में आता जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में किसानों की नाराजगी और युवा नेताओं की सक्रियता आने वाले राजनीतिक भविष्य के लिए बड़े संकेत दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने समय रहते समझदारी का परिचय देते हुए किसानों से बातचीत कर संतोषजनक समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन प्रदेशभर में एक बड़ी राजनीतिक चुनौती का रूप ले सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार हनुमान बेनीवाल की इस चेतावनी और घड़साना के किसानों की मांगों पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है और कब तक कोई ठोस प्रशासनिक कदम उठाया जाता है।