GenZ से भी दो कदम आगे निकली 'जेन अल्फा', यूपी-बिहार और राजस्थान के छात्र अचानक क्यों हुए इतने आक्रामक
बदलते दौर के साथ युवाओं की सोच और उनका मिजाज भी तेजी से बदल रहा है। अभी तक जहां इंटरनेट और सोशल मीडिया पर 'जेन जेड' (GenZ) के तौर-तरीकों की चर्चा होती थी, वहीं अब साल 2010 के बाद पैदा हुई नई पीढ़ी यानी 'जेन अल्फा' (Gen Alpha) ने मोर्चा संभाल लिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में इन दिनों स्कूली और कॉलेज स्तर के छात्रों का एक बेहद आक्रामक और मुखर रूप देखने को मिल रहा है। पढ़ाई से लेकर सोशल मीडिया ट्रेंड्स और जमीनी विरोध प्रदर्शनों तक, यह नई पीढ़ी जिस तरह से 'गदर' काट रही है, उसने समाजशास्त्रियों और शिक्षाविदों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
आखिर क्यों इतनी 'फायर' दिख रही है यह नई पीढ़ी?
इस आक्रामकता और बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण तकनीक का अत्यधिक प्रभाव है। जेन अल्फा को 'डिजिटल नेटिव्स' कहा जाता है, यानी वो पीढ़ी जिसने होश संभालते ही स्क्रीन, हाई-स्पीड इंटरनेट और एआई (AI) टूल्स को देखा है। यूपी, बिहार और राजस्थान के कस्बों और गांवों तक पहुंचे स्मार्टफोन और सस्ते डेटा ने इन छात्रों को दुनिया भर की जानकारियों से तुरंत जोड़ दिया है। अपनी बात को बिना किसी झिझक के बेबाकी से रखना और किसी भी मुद्दे पर तुरंत प्रतिक्रिया देना इस पीढ़ी की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है। यही वजह है कि पारंपरिक दायरों को तोड़कर ये छात्र हर मोर्चे पर बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं।
यूपी-बिहार से लेकर राजस्थान तक क्यों मचा है तहलका?
हिंदी पट्टी के इन तीनों राज्यों में छात्रों के बीच एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। चाहे प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग हो, स्कूल-कॉलेजों की व्यवस्था में सुधार का मुद्दा हो या फिर सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने की होड़—ये छात्र हर जगह सबसे आगे खड़े हैं। राजस्थान के कोचिंग हब कोटा से लेकर बिहार के पटना और यूपी के प्रयागराज जैसे शिक्षा के केंद्रों में छात्रों का यह बदला हुआ मिजाज साफ महसूस किया जा सकता है। ये सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर बेहद जागरूक और आक्रामक हैं।
भविष्य की ओर इशारा या व्यवस्था के लिए नई चुनौती?
जानकारों का मानना है कि जेन अल्फा का यह रूप उनकी असीम ऊर्जा और कुछ नया कर गुजरने की चाहत को दर्शाता है। वे पुरानी और धीमी व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाने को तैयार नहीं हैं, उन्हें हर चीज का समाधान तुरंत चाहिए। हालांकि, इस आक्रामकता के साथ एक चुनौती यह भी जुड़ी है कि अगर इनकी इस ऊर्जा को सही दिशा और सही मार्गदर्शन नहीं मिला, तो यह भटकाव का कारण भी बन सकती है। फिलहाल, यूपी, बिहार और राजस्थान के ये छात्र अपने तेवरों से यह साफ कर चुके हैं कि आने वाला दौर पूरी तरह से उनका ही होने वाला है।