24 घंटे बीतने के बाद भी सीएम भजनलाल शर्मा की माफी नहीं आई सामने
राजस्थान की सियासत में इन दिनों जुबानी जंग और तीखे बयानों का दौर अपने चरम पर है। सूबे के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भूचाल आ गया जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत तथा वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच उम्र, अनुभव और राजनीतिक सफर को लेकर एक तीखी बहस छिड़ गई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दिए गए एक बयान पर मचे बवाल के बाद से राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस खेमे का आरोप है कि वर्तमान सरकार और मुख्यमंत्री स्तर से अमर्यादित टिप्पणियां की जा रही हैं, जिसके बाद से माफी की मांग को लेकर 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था। निर्धारित 24 घंटे का समय पूरा होने के बाद भी जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की तरफ से कोई माफी या नरमी भरा बयान सामने नहीं आया, तो अशोक गहलोत ने एक बार फिर बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार करते हुए तंज कसा है। गहलोत ने अपने चिर-परिचित राजनीतिक अंदाज में कहा कि जब उन्होंने राजनीति की विधिवत शुरुआत की और अपनी दुकान खोली, तब वर्तमान मुख्यमंत्री महज 5 साल के बच्चे थे। इस बयान के सामने आने के बाद से राजस्थान की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है और दोनों प्रमुख दलों के बीच आर-पार की लड़ाई जैसे हालात बन गए हैं।
#1 क्या है पूरा सियासी विवाद और क्यों गरमाई है राजस्थान की राजनीति?
इस पूरे राजनीतिक टकराव की शुरुआत पिछले दिनों दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक मंचों और बयोंबाजी के जरिए हुई थी। प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका नहीं है जब दिग्गजों के बीच इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियां सामने आई हों, लेकिन इस बार मामला अनुभव और राजनीतिक कद को लेकर काफी आगे निकल गया है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि मौजूदा सरकार प्रदेश के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के बजाय केवल बयानबाजी और विपक्षी नेताओं पर व्यक्तिगत हमले करने में जुटी है। इसी सिलसिले में जब गहलोत खेमे की तरफ से वर्तमान मुख्यमंत्री के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की गई, तो सियासी पारा और अधिक ऊपर चढ़ गया। एक दिन का पूरा समय बीत जाने के बाद भी जब सत्ता पक्ष की तरफ से कोई माफीनामा या सुलह का संदेश नहीं आया, तो अशोक गहलोत ने इस मुद्दे को और हवा देते हुए अपने लंबे राजनीतिक अनुभव की याद दिलाई।
#1 अशोक गहलोत का तंज: 'अनुभव और उम्र का कोई विकल्प नहीं होता'
अपनी राजनीतिक परिपक्वता और लंबे प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाने वाले अशोक गहलोत ने अपने बयान में दो टूक कहा कि राजनीति में बड़प्पन और गरिमा का विशेष स्थान होता है। उन्होंने कहा कि वे दशकों से जनता की सेवा करते आ रहे हैं और उन्होंने राजस्थान की राजनीति के उतार-चढ़ाव को बहुत करीब से देखा है। तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा था और अपनी राजनीतिक 'दुकान' यानी जनसेवा का सफर शुरू किया था, तब विरोधी खेमे के कई नेता उम्र और अनुभव के मामले में बहुत पीछे थे। गहलोत समर्थकों का मानना है कि यह बयान केवल एक व्यक्तिगत कटाक्ष नहीं है, बल्कि यह वरिष्ठता और अनुभव के सम्मान की याद दिलाने का एक कड़ा राजनीतिक संदेश है।
#1 बीजेपी का पलटवार: जुबानी जंग और जनता से जुड़े असल मुद्दों से भटकाव का आरोप
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अशोक गहलोत के इस बयान और कांग्रेस के तेवर पर तीखा पलटवार किया है। सत्ताधारी पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के पास प्रदेश सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे ऐसे बयानों के जरिए सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा का यह भी कहना है कि वर्तमान भजनलाल सरकार पूरी पारदर्शिता और युवाओं के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है, जिससे विपक्ष बौखला गया है। जनता से जुड़े विकास, कानून व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों को छोड़कर इस प्रकार की व्यक्तिगत बयानबाजी से प्रदेश की राजनीति का स्तर गिर रहा है, जिसे जनता भली-भांति देख रही है।
#1 आगामी सियासी समीकरणों पर पड़ने वाला असर और जनता की प्रतिक्रिया
राजस्थान की राजनीति में इस प्रकार के हाई-वोल्टेज ड्रामे का असर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और राजनीतिक रणनीतियों पर पड़ना तय है। दोनों ही दल एक-दूसरे को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। जहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी इसे वरिष्ठ नेताओं के सम्मान और शिष्टाचार की लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा इसे काम बनाम बयानबाजी की बहस करार दे रही है। सूबे के आम मतदाता इस पूरी उठापटक को बड़ी दिलचस्पी से देख रहे हैं, क्योंकि इस राजनीतिक रस्साकशी के बीच वास्तविक विकास के मुद्दे अक्सर पृष्ठभूमि में चले जाते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह जुबानी जंग यहीं थमती है या आने वाले सत्रों और सभाओं में दोनों पक्षों के बीच और अधिक तीखा संघर्ष देखने को मिलता है।